कोटपूतली में बारिश के बाद घना कोहरा:विजिबिलिटी 50 फीट से कम, धीमी रफ्तार से चली गाड़ियां; फसलों पर भी असर

कोटपूतली क्षेत्र में पिछले 24 घंटों के दौरान 12 एमएम बारिश दर्ज की गई है। बारिश के बाद बुधवार सुबह क्षेत्र में घना कोहरा छा गया। विजिबिलिटी 50 फीट से भी कम होने के कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 48 पर वाहन चालक हेडलाइट और फॉग लाइट का उपयोग कर धीमी गति से चल रहे हैं। कोटपूतली क्षेत्र में आज अचानक मौसम के बदलाव से फुलेरा दूज के अबूझ सावे के चलते जिले में सैकड़ों शादियों में खलल पड़ा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पकी हुई या पकने की कगार पर खड़ी फसलों पर घने कोहरे का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है, जिससे किसानों को नुकसान हो सकता है। विशेष रूप से, पकी हुई या कटाई के करीब खड़ी सरसों की फसल पर घने कोहरे और अत्यधिक ओस का नकारात्मक असर देखा जा रहा है। यह कोहरा सरसों के उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को प्रभावित कर सकता है। कोहरे और धूप की कमी से पौधों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बाधित होती है, जिससे दानों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता और वे कमजोर व पतले रह जाते हैं। लगातार नमी के कारण दानों में तेल की मात्रा कम हो सकती है और उनका रंग फीका पड़ सकता है। इसके अलावा, लगातार नमी से पकी हुई फलियों पर झुलसा रोग और सफेद फफोले का खतरा बढ़ जाता है, जिससे फलियां सड़ सकती हैं। कोहरा छंटने और मौसम साफ होने पर माहू कीट तेजी से फूलों और फलियों पर हमला कर सकता है, जिससे फसल पूरी तरह बर्बाद होने का जोखिम रहता है। कोहरे के कारण खेतों में नमी बनी रहती है, जिससे सरसों की कटाई में देरी होती है और कटी हुई फसल को सूखने में भी अधिक समय लगता है। यदि कोहरे और ठंड के बाद अचानक तेज धूप निकलती है, तो पकी हुई फलियां चटक कर टूट सकती हैं, जिससे दाने खेत में ही बिखर जाते हैं और किसानों को और अधिक नुकसान होता है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *