कोटा की बेटी ने आयशा नेशनल इवेंट में अपना दमखम दिया है। आयशा ने ओडिशा में आयोजित हुई 39 वीं राष्ट्रीय जूनियर एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 200 मीटर रेस के फाइनल में जगह बनाते हुए सिल्वर मेडल हासिल किया है। आयशा के पिता पंचर की दुकान लगाते थे। 27 नवंबर को दुकान पर ट्रक का टायर फटने से उनकी मौत हो गई थी। पिता अब्दुल रहीम के सपने को पूरा करने के लिए उनकी बेटी नेशनल एथेलेटिक्स प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए ओडिशा गई थी। पहल फाउंडेशन के राष्ट्रीय सचिव फारुख राणा ने बताया कि पिता के सपनों को साकार करने के लिए बेटी आयशा ने पिता की मौत के गम के बावजूद सफलता हांसिल की। समाज के लोग आगे आए और परिवार की आर्थिक मदद के साथ ही उनके साथ खडे रहे। जिस कारण बच्चों का हौंसला बढा और वह एक बार फिर पिता के सपने को पूरा करने के लिए निकल पडे। पिता ने बच्चों को पंचर की दुकान लगाकर बडा खिलाड़ी बनाने का सपना लिया था। अब्दुल रहीम ने दिन रात एक कर सपना तो पूरा कर गए लेकिन उस सपने की जीत का उत्साह नहीं देख सके। आयशा की छोटी बहन शाजिया और भाई जूनेद अली भी जिला स्तरीय व राज्य स्तरीय प्रतियोगिता खेल चुके है। बेटा तीन बार से जिला का चैंपियन है।


