कोटा जिले से चयनित 30 पशुपालकों, किसानों के दल को कृषि विभाग के द्वारा 7 दिनों के लिए कोटा से हरियाणा के करनाल भेजा गया है। कृषि विभाग के सहायक निदेशक ने हरी झंडी दिखाकर किसानों के दल को कोटा से रवाना किया। करनाल के कृषि विज्ञान केंद्र में आधुनिक तकनीक से खेती करने व पशुधन रखने की नयी टेक्नोलॉजी का प्रशिक्षण लेंगे। हरियाणा जाकर लेंगे प्रशिक्षण सहायक निदेशक राजवीर सिंह ने बताया कि क्लस्टर अप्रोच के तहत पूरे जिले भर के किसानों को एक समूह में वहां प्रशिक्षण दिया जाएगा। 10 मार्च तक के प्रशिक्षण लेकर किसान वहां से निकलेंगे। आधुनिक तकनीकी के साथ कुछ अच्छे किसान बनेंगे तो कुछ पशुपालक। करनाल एनडीआरआई के पास ही कृषि विज्ञान केंद्र है। राज्य सरकार की मंशा है कि इन किसानों में उन्नत तकनीकी को अपनाकर किसान अपना जीवन उन्नत करें। दूसरे किसान भी देख कर उसको प्रेरित करे। बोले- नई तकनीक को सीखेंगे राजवीर सिंह ने बताया कि संस्था के तहत हम कृषिगत में जो विधियां हैं उनको बूस्ट करके किसानों को जहां-जहां जिन योजनाओं का क्लस्टर में लाभ दिया जाना है उसका एक जिला स्तरीय संरचनात्मक ढांचा तैयार किया है। उसके तहत किसानों को प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है। राष्ट्रीय महत्व का अनुसंधान केंद्र करनाल में है वहां यह 4 मार्च से 10 मार्च तक प्रशिक्षण पर रहेंगे। किसानों को भेजने का उद्देश्य यह है कि भारत भर में बहुत विविधता है। अलग-अलग तरह की कृषि जलवायु है। अलग-अलग तरह के अनुसंधान क्षेत्र होते हैं। ऐसे में किसान अलग जगह की तकनीक को सीख कर अपने खेत मे लागू करे जिससे कि दूसरे किसान भी नयी तकनीक को सीखें। सीखने का तरीका भ्रमण रहा है राजवीर सिंह ने बताया कि सरकार को किसानों को सिखाने का उद्देश्य यही होता है। भारत इतनी विविध जनसंख्या का देश है यहां हर आदमी को हर चीज एक क्लास रूम में बैठ कर के समझाया जाना मुश्किल है। सीखने का जो तरीका है वह भ्रमण रहा है। हम भ्रमण पर किसानों को भेज रहे हैं वहां जाकर के व्यावहारिक रूप से उन चीजों को होता देखेंगे तो फिर अपने यहां पर करने लगेंगे। सरकार का हर साल का इस तरह के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण होता रहता हैं। एनडीआरआई करनाल नेशनल राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान केंद्र है। वहां पर पशुधन को किस तरह से उन्नत तकनीकी के साथ रखा जाता है। वहां इतनी बेहतरीन व्यवस्था है मिल्किंग का पशु संरक्षण का और उनके नहलाने का हमारा किसान जो पशु रखता है उसका तरीका और जो वैज्ञानिक पशुधन रखने का तरीका अलग है। यहां का पशु 4 लीटर दूध दे रहा है और उसके साथ भी स्वच्छ दूध उत्पादन नहीं हो रहा है तो वह आपको बीमार कर रहा है। वहा पर यह सारी चीजें देखने ओर सीखने को मिलेगी। किस तरह से तकनीकी मानव जीवन में सहायता उपलब्ध कराती है और किस तरह से किसान का तकनीकी से उन्नयन होता है।


