कोटा में बंदरिया की शव यात्रा, अंतिम संस्कार भी किया:अनाथ बंदरों के लिए बनेगा आश्रय स्थल, ई-रिक्शा पर वानर मोक्ष रथ भी बनाएंगे

शहर के किशोर सागर तालाब पर तेजाजी मंदिर के पास दोपहर के समय एक बंदरिया की ट्रांसफॉर्मर के पास करंट से लगने से मौत हो गई। बंदरिया का बच्चा पास में खेल रहा था जो बच गया। बंदरिया की पीठ व दोनों हाथ पैर करंट से झुलस गए ओर मौके पर ही मृत्यु हो गई। राहगीरों ने कर्मयोगी सेवा संस्थान को सूचना दी। कर्म योगी ने मौके पर पहुंचकर बंदरिया के बच्चे को अपने पास में रख लिया और विधि विधान से बंदरिया का अंतिम संस्कार किया। करंट लगने से हुई थी मौत राजाराम जैन कर्मयोगी ने बताया की बंदरिया की करंट लगने से मौत हो गई। लोगों ने सूचना दी में मौके पर पहुंचा उसका एक बच्चा भी था उसे मैंने अपने पास रख लिया। अंतिम संस्कार की तैयारी करते हुए किशोरपुरा मुक्तिधाम पर उसका अंतिम संस्कार किया गया। राजाराम ने बताया कि नयापुरा इलाके में सीबी गार्डन के आसपास बंदरों की संख्या काफी ज्यादा है। अक्सर इस प्रकार की घटना शहर में अन्य स्थान पर भी घटती रहती है। इससे पूर्व भी अभी 3 माह की अवधि में कोटा दक्षिण महापौर की सूचना पर कर्मयोगी द्वारा अलग-अलग समय पर चार मृतक बंदरों का अंतिम संस्कार किया गया। उनके पास से भी दो बच्चे कर्मयोगी ने अपने पास में रखे है। मृत बंदरों के बच्चों के लिए बनाएंगे आश्रय स्थल राजाराम ने बताया कि कर्मयोगी ने सहयोगी संस्थान तेजाजी मंदिर के पास स्थित शीतला माता मंदिर अध्यक्ष करण बागड़ी बाबा रामदेव मंदिर अध्यक्ष बाबा रवि बागड़ी के सहयोग से रामनवमी पर निर्णय लिया है कि शहर में किसी भी क्षेत्र में किसी भी कारणवश या दुर्घटना की वजह से मरने वाले बंदर का अंतिम संस्कार विधि विधान रूप से किया जाएगा एवं उनकी अस्थियों का विसर्जन हरिद्वार में किया जाएगा। रामदेव मंदिर पर मृतक बंदरों के अनाथ बच्चों का आश्रय स्थल बनाया जाएगा जब तक कि वह बड़े नहीं हो जाते और अपना स्थान नहीं बना लेते क्योंकि किसी भी मृतक बंदर के बच्चे को अन्य बंदर नहीं अपनाते ओर ना ही अपने समूह में लेते हैं। वानर मोक्षरथ बनाएंगे ऐसे बंदरों को हमला करके मार देते हैं ऐसे हालातों में ऐसी कोई व्यवस्था शहर में नहीं है जहां बंदरों के अनाथ बच्चों को रखा जा सके। कर्मयोगी सेवा संस्थान द्वारा जून माह तक जन सहयोग से ई-रिक्शा पर वानर मोक्षरथ का निर्माण भी करवाया जाएगा। जिसमें विधि विधान रूप से मृतक वानर की राम धुन के साथ अंतिम यात्रा निकालते हुए मुक्तिधाम पर दाह संस्कार किया जाएगा।

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