बयाना उपखंड क्षेत्र का गांव कोठीखेड़ा इन दिनों अपने खेतों से उठती तीखी खुशबू के साथ पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां की ईगल मिर्च ने न सिर्फ किसानों की आर्थिक हालत सुधारी है, बल्कि गांव की पहचान को भी नई ऊंचाई दी है। पारंपरिक खेती का दायरा छोड़कर गांव के किसान अब इस विशेष किस्म की मिर्च की खेती से अच्छा-खासा मुनाफा कमा रहे हैं। मिर्ची उत्पादक किसान फिरोज बताते हैं कि ईगल मिर्च की सबसे बड़ी खासियत इसका छोटा आकार, गजब का तीखापन और प्रीमियम क्वालिटी है। यही वजह है कि इसकी मांग स्थानीय बाजार से लेकर दिल्ली और जयपुर के बड़े होटलों तक लगातार बनी हुई है। कोठीखेड़ा की मिट्टी और यहां की जलवायु इस किस्म की मिर्च के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है, जिससे यहां की फसल प्राकृतिक रूप से अधिक गुणवत्ता और ग्रोथ देती है। अब “ईगल मिर्च गांव” के नाम से मशहूर कोठीखेड़ा लगातार बढ़ती मांग, गुणवत्ता और तीखेपन ने कोठीखेड़ा की ईगल मिर्च को एक ब्रांड बना दिया है। आसपास के जिलों के साथ-साथ अब बड़े शहरों के होटल उद्योग में भी इसकी पहुंच बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में यह मिर्च गांव की आर्थिक रीढ़ साबित होगी। कोठीखेड़ा के किसान आज ईगल मिर्च की बदौलत तीखे स्वाद के साथ मीठा मुनाफा कमा रहे हैं। यह सफलता न केवल कृषि नवाचार का उदाहरण है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कहानी बन चुकी है। बाजार में मजबूत पकड़, कीमत ₹50 से ₹80 किलो…. बाजार में ईगल मिर्च की खुदरा कीमत ₹50 से ₹80 प्रति किलो तक रहती है। होटल व्यवसायियों, मसाला व्यापारियों और विशेष स्वाद वाले उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। किसान बताते हैं कि यह मिर्च देखने में भले ही छोटी हो, लेकिन तीखापन इतना तेज है कि स्वाद तुरंत महसूस होता है, और यही इसकी सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है। फसल ने किसानों के चेहरों पर लौटाई मुस्कान… गांव के कई किसान बताते हैं कि पहले से बोई गई मिर्च की फसल इस समय खेतों में पूरी तरह लहलहा रही है। पौधों पर लगी चमकदार मिर्चें देखकर किसानों के चेहरों पर खुशी साफ झलकती है। गांव में करीब दो दर्जन किसान लगभग 50 बीघा जमीन में ईगल मिर्च की खेती कर रहे हैं और हर सीजन में अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। आसपास के गांव के किसान भी इस खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं। फैक्ट फाइल


