डिंडौरी के सिटी कोतवाली थाने में गुरुवार को पीडब्ल्यूडी विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के खिलाफ ऑफिस में बुलाकर अभद्रता करने और ऑडिटर के माध्यम से रिश्वत लेने की शिकायत की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। पीडब्ल्यूडी विभाग के ठेकेदार सुरेन्द्र प्रसाद ओझा ने आरोप लगाया कि 11 दिसंबर को शहपुरा एसडीओ कार्यालय से फोन आया कि डिंडौरी में काम को लेकर एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एसएस ठाकुर चर्चा करना चाहते हैं। जैसे ही मैं ऑफिस पहुंचा तो काम करने के एवज में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने एक लाख रुपए की मांग की। इंजीनियर का कहना था कि तुम्हें एक लाख रुपए ऑडिटर जगदीश ताम्रकार को देने के लिए कहा था, लेकिन तुमने 16 हजार 800 रुपए ही दिए। बाकी पैसे दो, नहीं तो टेंडर कैंसल कर देंगे। एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बोले- 6 महीने से काम अधूरा, अब झूठे आरोप लगा रहा एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एसएस ठाकुर ने बताया कि सुरेंद्र प्रसाद ओझा के पास शहपुरा सब डिवीजन में कोहानी देवरी से मानिकपुर तक 6 किलोमीटर 90 मीटर सड़क निर्माण का टेंडर है। उसे 15 जून 2024 को काम पूरा करना था, लेकिन 6 महीने से काम अधूरा पड़ा है। अधिकारियों की डांट सुननी पड़ती है। इसलिए उसे बुलाया था। उससे कहा- काम पूरा करिए, नहीं तो टेंडर निरस्त करने के लिए वरिष्ठ कार्यालय को लिखेंगे। इतने में वह भड़क गया और अनाप शनाप बोलते हुए निकल गया। उससे किसी तरीके से पैसे की मांग नहीं की। ऑडिटर ने कहा- ठेकेदार ने पैसे खाते में डाले और नकद लिए वहीं ऑडिटर जगदीश ताम्रकार ने कहा कि ठेकेदार सुरेन्द्र प्रसाद ओझा मेरे पास आए। उन्होंने कहा कि किसी को पैसे देना हैं। मैं आपको ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कर रहा हूं। आप मुझे नकद दे दो। इस पर ठेकेदार ने फोन-पे पर 16 हजार 8 सौ रुपए डाले और नकद ले लिए। उस दौरान हमारे स्टाफ के साथी भी मौजूद थे। रिश्वत मांगने के आरोप झूठे हैं। मामले में सिटी कोतवाली निरीक्षक गिरवर उईके का कहना है कि ठेकेदार का आवेदन प्राप्त हुआ है। इसकी जांच कराई जाएगी।


