कोरबा में केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी से मुलाकात के दौरान छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने बड़े घोटाले का मामला उठाया है। उन्होंने कोयला खदान के लिए अधिग्रहित की गई जमीनों के मुआवजे में हुए घोटाले और जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) की राशि के दुरुपयोग की शिकायत की है। कंवर ने बताया कि रलिया और मलगांव की जमीनों के मुआवजे में बड़ी गड़बड़ी हुई है। गैर-निवासियों ने अपने नाते-रिश्तेदारों और नौकरों के नाम से मुआवजा हासिल किया है। कुछ बड़े प्रशासनिक अधिकारियों ने भी अपने रिश्तेदारों के नाम से जमीनों का बंटवारा करा करोड़ों रुपए का मुआवजा लिया है। पूर्व गृहमंत्री ने आरोप लगाया कि कई लोगों को फर्जी तरीके से जमीन का मालिक और खातेदार बताया गया। ऐसे लोगों को भी मुआवजा दिया गया जो कभी गांव में रहे ही नहीं। यहां तक कि कभी नहीं बनी संपत्तियों को दिखाकर भी मुआवजा दिया गया। जमीनों के मुआवजे में हुए घोटाले की सीबीआई से जांच की मांग राज्य सरकार की जांच एजेंसियों पर अविश्वास जताते हुए कंवर ने इस पूरे मामले की जांच ईडी और सीबीआई से कराने की मांग की है। उन्होंने एसडीएम और लिपिक के कारनामों की भी जांच की मांग की है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि जिस तहसीलदार के खिलाफ शिकायत लंबित है, उसे ही एसडीएम कैसे बना दिया गया। गौरतलब है कि केंद्रीय कोयला मंत्री गुरुवार को कोरबा के दौरे पर थे। उन्होंने गेवरा कोयला खदान का निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देश दिए। इस दौरान एसईसीएल के अधिकारियों ने सब कुछ ठीक होने का दावा किया, लेकिन कंवर ने मुलाकात में वास्तविक स्थिति से अवगत कराया।


