कोरबा में 48 घंटे में 4 स्टूडेंट्स ने की आत्महत्या:जांजगीर-चांपा में छात्रा ने की खुदकुशी, मनोचिकित्सक बोले- पढ़ाई के लिए ज्यादा दबाव न डाले

छत्तीसगढ़ में 12वीं की बोर्ड परीक्षा 20 फरवरी से और 10वीं की परीक्षा 21 फरवरी से शुरू होने वाली है। लेकिन परीक्षा से पहले ही कई स्टूडेंट्स तनाव में आकर आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे हैं। कोरबा में पिछले 48 घंटों में 4 स्टूडेंट ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। जांजगीर-चांपा में भी बुधवार को 12वीं की छात्रा ने घर के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के समय छात्रा के माता-पिता मजदूरी के लिए बाहर गए थे। वो घर पर अकेली थी। जब मां मजदूरी से लौटी तो दरवाजा अंदर से बंद पाया। सभी स्टूडेंट्स एग्जाम की तैयारी में लगे हुए थे। इन घटनाओं को लेकर मनोचिकित्सक का कहना है कि माता-पिता को बच्चों पर ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहिए, और न ही दूसरे बच्चों से तुलना करना चाहिए। देखिए पहले ये तस्वीरें- केस- 1 पहली घटना कोतवाली थाना क्षेत्र के इंद्रानगर दुरपा, वार्ड नंबर-5 की है। मंगलवार को 17 वर्षीय अंजलि केंवट ने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। अंजलि 10वीं कक्षा की छात्रा थी और दुरपा रोड स्थित लवली केयर स्कूल में पढ़ती थी। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव का पंचनामा कर पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भिजवाया। हालांकि, मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं किया गया है। भाई कार्तिक ने बताया कि अंजलि बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रही थी। केस- 2 दूसरी घटना उरगा थाना क्षेत्र के धमनागुड़ी मोहार गांव की है। मंगलवार को ही 16 वर्षीय गीता महंत ने गांव के तालाब के पास एक पेड़ से फांसी लगा ली। वह 9वीं क्लास में पढ़ती थी। सुबह करीब 11 बजे नहाने के लिए घर से निकली थी। ग्रामीणों की सूचना पर उरगा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। परिजनों के अनुसार, सितंबर महीने में गीता की मां की अचानक तबीयत खराब होने से मौत हो गई थी। मां की मौत के बाद से गीता परेशान रहती थी और उसकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही थी। इस मामले उरगा थाना प्रभारी राजेश तिवारी ने बताया कि सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर परिजनों के बयान दर्ज किए गए हैं और आगे की कार्रवाई की जा रही है। केस- 3 तीसरी घटना सिविल लाइन थाना क्षेत्र के रामपुर आईटीआई बस्ती की है। 17 वर्षीय उज्जवल डनसेना उर्फ ध्रुव ने अपने कमरे में पंखे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उज्जवल एसईसीएल डीएवी पब्लिक स्कूल में 12वीं कक्षा का छात्र था। उज्जवल कॉमर्स विषय का छात्र और क्लास मॉनिटर था। बुधवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक सेंट जेवियर स्कूल में फिजिकल एजुकेशन का पेपर देने नहीं पहुंचा। जब वह परीक्षा में अनुपस्थित रहा, तो स्कूल के कुछ शिक्षक उसके घर पहुंचे। घर का दरवाजा अंदर से बंद था और तेज आवाज में टीवी-गाने चल रहे थे। खिड़की से देखने पर उज्जवल का शव पंखे से लटका मिला। सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। कोरबा सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि घटनास्थल से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जो अंग्रेजी में लिखा गया है। सुसाइड नोट में उज्जवल ने अपनी मौत के बाद शव को मेडिकल कॉलेज को दान करने की इच्छा व्यक्त की है। केस- 4 चौथी घटना भी बुधवार को सिविल लाइन थाना क्षेत्र की है। सीएसईबी कॉलोनी में रहने वाले 12वीं कक्षा के छात्र दीपांशु कौशिक (पिता- गजेंद्र कौशिक) ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के समय दीपांशु घर पर अकेला था। पुलिस मामले की जांच कर रही है। केस- 5 पांचवीं घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के लछनपुर गांव की है। 18 वर्षीय छात्रा रजनी सूर्यवंशी अपने कमरे में पंखे से लटकी मिली। जब उसकी मां मजदूरी से लौटी तो उन्होंने दरवाजा अंदर से बंद पाया। कई बार आवाज देने पर भी कोई आवाज नहीं आई। खिड़की से झांकने पर उन्होंने अपनी बेटी को फंदे से लटका देखा। परिजनों ने पड़ोसियों की मदद से दरवाजा तोड़ा, लेकिन तब तक रजनी की मौत हो चुकी थी। सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को नीचे उतारा। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल की मॉर्चुरी में रखवा दिया है। गुरुवार सुबह शव का पोस्टमॉर्टम किया जाएगा। इस मामले में थाना प्रभारी जयप्रकाश गुप्ता ने बताया कि, शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि रजनी सूर्यवंशी वीडियो कॉल पर किसी लड़के से बात कर रही थी। इस संबंध में तथ्यात्मक जांच की जाएगी। डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। आत्महत्या के कारणों की जांच की जा रही है। डॉक्टर की सलाह: बच्चों पर दबाव न बनाएं जिला मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अंकित गुप्ता ने इन घटनाओं पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि परीक्षा नजदीक आने पर बच्चों में तनाव बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि माता-पिता को बच्चों पर ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहिए। बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से करने से बचना चाहिए। इससे बच्चों में तनाव, अवसाद, हीन भावना बढ़ सकती है। आत्मविश्वास भी कम हो सकता है।

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