देशभर की अदालतों में केंद्र सरकार से जुड़े लगभग 1.50 लाख अवमानना (अनादर) के मामले पेंडिंग है। इसके चलते कानून मंत्रालय ने अन्य मंत्रालयों को निर्देश दिया है। इसमें कहा गया है कि कोर्ट के आदेशों का समय पर और पर्याप्त जवाब दें, जिससे अवमानना कार्यवाहियों को रोका जा सके। कानून मंत्रालय ने कहा- मिनिस्ट्री और उनके विभागों में मुकदमों को संभालने वाले कई अधिकारी कानून के क्षेत्र में योग्यता नहीं रखता है। इसके कारण कानूनी समझ की कमी और ज्यूडिशिअल निर्देश के जवाब में देरी होती है। इससे संगठनों के प्रमुखों के खिलाफ अवमानना के मामले दर्ज होते हैं। बजट सत्र के दौरान लोकसभा में एक लिखित जवाब में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा था कि अदालती आदेशों को लागू करने की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक मंत्रालयों और विभागों पर है। मंत्रालय के निर्देश में कहा गया कि संसाधनों की कमी के कारण मंत्रालयों की मुकदमों को संभालने की क्षमता सीमित है। अधिकांश मंत्रालयों और विभागों में कानूनी सेल नहीं है। मामले एडमिनिस्ट्रेशन या टेक्निकल डिवीजन संभालती हैं। मंत्रालय ने कहा कि कभी-कभी न्यायिक निर्णयों और आदेशों का पालन न करने के चलते सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की जाती है। इसे बेहतर निगरानी और मैनेजमेंट सिस्टम बनाकर रोका जा सकता है। मंत्रालय के दिए निर्देश मेघवाल ने कहा था- 5 करोड़ केसों का जल्द निपटारा होगा केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने जनवरी 2025 में कहा था कि वर्तमान में देश की अदालतों में 5 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं। इनके निपटारे के लिए ‘अल्टरनेट डिस्प्यूट रेजोल्यूशन मेकैनिज्म’ (ADR) सिस्टम तैयार किया गया है। इस व्यवस्था में आर्बिट्रेशन, मेडिएशन और लोक अदालत जैसे विकल्पों का प्रयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि 1 जुलाई 2024 से भारतीय न्यायिक संहिता (IPC के स्थान पर), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (CrPC के स्थान पर) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act के स्थान पर तीन नए कानून लागू होंगे।………………….. कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल से जुड़ी अन्य खबर… केंद्रीय मंत्री बोले-वक्फ बिल से अल्पसंख्यकों की संपत्ति सुरक्षित रहेगी:अर्जुनराम मेघवाल ने नेशनल हेराल्ड मामले पर कहा- ईडी कांग्रेस के समय से बनी हुई, कानून सब पर लागू होगा


