प्रगतिशील लेखक संघ, दौसा और कला पंख संस्थान, जयपुर की ओर से होटल रावत पैलेस में “कोहरे में साहित्य” विषय पर रचना, पाठ और संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. हेतु भारद्वाज की अध्यक्षता में कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम के विषय को स्पष्ट करते हुए विशाल विक्रम सिंह ने कहा- सामने से दृश्य के गायब हो जाने का मतलब दृष्टि गायब होना नहीं है। कोहरा लगातार घना होता जा रहा है और इसे प्रतिरोध और संघर्ष से ही हटाया जा सकता है।” उन्होंने पूंजीवाद और फासिज्म के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि केवल साहित्य ही इस कोहरे को दूर कर सकता है। डॉ. हेतु भारद्वाज ने कहा विचारों पर छाया यह कोहरा, जो अंधकार का पर्याय है, साहित्यकारों के लिए चुनौती है। साहित्यकार समाज की चेतना और विचारधारा के वाहक होते हैं और उन्हें अपनी रचनाओं के माध्यम से अन्याय, असमानता और अज्ञानता के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। प्रदेश के साहित्यकारों ने सुनाई अपनी रचनाएं
वरिष्ठ आलोचक राजाराम भादू ने कहा कोहरा प्राकृतिक है, लेकिन स्मॉग मानव जनित है। साहित्य और संस्कृति में भी प्रदूषण फैला है, जिसे ज्ञान और प्रकटिकरण के माध्यम से ही दूर किया जा सकता है। कार्यक्रम को दो सत्रों में आयोजित किया गया। पहले सत्र में कहानी पाठ हुआ, जिसमें प्रदेशभर से आए साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। कहानी पाठ में धर्मेंद्र कुमार सैनी की “नया गांव”, अजय अनुरागी की “बीच में घर”, राजेंद्र यादव “आज़ाद” की “दिखावा”, ज्ञानचंद बागड़ी की “कुण्डली”, रजनी मोरवाल की “मरीन ड्राइव की खाली बोतल”, चरण सिंह पथिक की “रोजड़े” और डॉ. हेतु भारद्वाज की “पंच परमेश्वर” प्रमुख रचनाएं रहीं। उपन्यास “किन्नर मा” का विमोचन
दूसरे सत्र में कविता पाठ का आयोजन हुआ, जिसकी अध्यक्षता प्रलेस राजस्थान के अध्यक्ष गोविंद माथुर ने की और संचालन कवि प्रेमचंद गांधी ने किया। इस सत्र में अपर्णा, जे. संतोष, अनीता चौधरी, बृजमोहन मीणा, वैभव व्याकुल, नैनूराम मीणा, प्रकाश प्रियम, बाबूलाल शर्मा “विज्ञ”, अमर दलपुरा, कृष्ण कल्पित, अजंता देव, गोविंद सिंह नाहटा, फ़ारूक़ आफ़रीदी, हरीश करमचंदानी और राघवेंद्र रावत जैसे कवियों ने अपनी कविताओं का पाठ किया। इस अवसर पर राजेंद्र यादव “आजद” लिखित थर्ड जेंडर पर आधारित उपन्यास “किन्नर मा” का विमोचन भी किया गया। इस उपन्यास का प्रकाशन न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन ने किया है। कार्यक्रम के अंत में प्रलेस दौसा इकाई के महासचिव विजय राही ने सभी का आभार व्यक्त किया। होटल रावत पैलेस के स्वामी मनोहर लाल गुप्ता ने सभी साहित्यकारों को दौसा के संत सुंदरदास का साहित्य भेंट किया। यह आयोजन साहित्य और समाज के बीच संवाद को मजबूत करने का बेहतरीन प्रयास रहा।


