क्या युवा सिर्फ कंपनियों में गार्ड बनने के लिए बना:शिव विधायक भाटी बोले- युवाओं को क्या मिला, रोजगार भी नहीं मिला?

राजस्थान विधानसभा में युवा एवं खेल मामलों पर हुई चर्चा के बाद शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने मीडिया से बात करते हुए कहा- भारत को युवाओं का देश कहा जाता है। देश की लगभग 65% आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। राजस्थान में भी युवाओं की संख्या अत्यधिक है। लेकिन विडंबना यह है कि चाहे विधानसभा हो या संसद, युवाओं का प्रतिनिधित्व नगण्य है। 10 प्रतिशत का आंकड़ा भी मुश्किल से पार होता है। जिनके भविष्य का सवाल है, वही निर्णय प्रक्रिया से बाहर है। भाटी ने राइजिंग राजस्थान पर भी कटाक्ष किया। कहा- सोलर कंपनियों को जमीन दी जा रही है। युवाओं के लिए उद्योग नहीं हैं, वो क्या केवल सोलर कंपनियों में गार्ड बनने के लिए बने हैं? बोले- देश में राजस्थान बेरोजगारी वाले राज्यों में भाटी ने बेरोजगारी के मुद्दे को सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि हर सरकार रोजगार और स्किल डेवलपमेंट के बड़े-बड़े दावे करती है। लेकिन जमीनी सच्चाई अलग है। विभिन्न श्रम सर्वेक्षणों और स्वतंत्र एजेंसियों के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान लंबे समय तक देश में सर्वाधिक बेरोजगारी दर वाले राज्यों में गिना जाता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में संचालित अधिकांश स्किल सेंटर केवल कागजों तक सीमित हैं। एक भी ऐसा मॉडल स्किल सेंटर नहीं दिखता जहां युवाओं को आधुनिक उद्योगों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जा रहा हो। डिग्री मिल रही है, कौशल नहीं; प्रमाणपत्र मिल रहा है, रोजगार नहीं। ‘क्या युवा सिर्फ सोलर प्लांट में गार्ड बनेगा’ राइजिंग राजस्थान पर निशाना साधते हुए भाटी ने कहा- इस इवेंट में 27 लाख करोड़ रुपए से अधिक के एमओयू सोलर कंपनियों के साथ किए गए। हर कैबिनेट बैठक में सोलर कंपनियों को भूमि आवंटित की जा रही है। हजारों बीघा भूमि निजी हाथों में जा रही है। लेकिन इसके बदले में राजस्थान के युवाओं को क्या मिला? क्या उन्हें स्थायी रोजगार मिला? क्या उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया? क्या उन्हें उद्योग में भागीदारी मिली? उन्होंने कहा, “क्या राजस्थान का युवा केवल सोलर प्लांट में गार्ड बनने के लिए बना है?” खेलों में चमक-दमक, जमीनी ढांचा शून्य खेलों के मुद्दे पर भाटी ने कहा- प्रदेश में अनेक खेलों के कोचों के पद रिक्त हैं, खेल अधिकारियों के पद सालों से भरे नहीं गए, और जो अस्थायी नियुक्तियां हुई हैं उन्हें स्थायी करने की दिशा में भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। खेलो इंडिया में करोड़ों रुपये खर्च कर भव्य आयोजन किए जाते हैं। लेकिन मूलभूत ढांचे की कमी जस की तस है। कुछ प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों की संख्या बेहद सीमित रही। जब प्रशिक्षण, कोचिंग और बुनियादी सुविधां ही नहीं होंगी तो प्रतिभा कहां से निखरेगी? प्रदेश का सर्वोच्च खेल सम्मान महाराणा प्रताप खेल पुरस्कार वर्ष 2017-18 के बाद नियमित रूप से आयोजित नहीं हुआ। राजस्थान जैसे बड़े राज्य से आज तक कोई स्थायी ओलंपिक पदक विजेता तैयार नहीं हुआ। यह केवल खिलाड़ियों की कमी नहीं, नीति और इच्छाशक्ति की कमी है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *