क्राइम छोड़ चुके हिस्ट्रीशीटर का दिल दहलाने वाला मर्डर:पहले गोलियां मारीं, फिर पत्थर से वार, सिर 5 इंच जमीन में धंसा, पार्ट-1

राजस्थान क्राइम फाइल में इस बार कहानी अजय यादव हत्याकांड की। अजय यादव कभी जयपुर के सदर पुलिस थाने का हिस्ट्रीशीटर था। उसके खिलाफ 10 केस दर्ज थे। इसी बीच एक मर्डर केस में नाम आने पर अजय यादव जेल चला गया। जब लौटा तो बदला हुआ था, उसने क्राइम की दुनिया को अलविदा कह दिया। जिंदगी में सब कुछ सही चल रहा था। इसके बावजूद एक दिन उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…….. 21 सितंबर 2021 जयपुर का बनीपार्क इलाका। अचानक दोपहर करीब 1 बजे एक के बाद एक कई फायर हुए। गोलियों की आवाज से इलाके में हड़कंप मच गया। फायरिंग राममंदिर के नजदीक सूतमील कॉलोनी में रेलवे फाटक के पास चाय की थड़ी के पास हुई थी। प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को बताया कि वारदात के समय अजय और उसका दोस्त सौरभ स्कॉर्पियो में बैठे थे। इसी दौरान 12 बजकर 53 मिनट पर दो बिना नंबर की स्कूटी पर चार लोग मुंह पर मास्क बांधे आए। उन्होंने आते ही अजय पर फायरिंग शुरू कर दी। उस समय अजय ड्राइविंग सीट पर बैठा था। ऐसे में वह बचने के लिए झुक नहीं पाया। गोली उसके कंधे में लगी। लगातार फायरिंग होने पर अजय और सौरभ उतरकर अलग-अलग दिशा में जान बचाने के लिए भागे। बदमाशों ने अजय का पीछा किया और उसके पेट में गोली मारी। अजय पर एक के बाद एक 5 फायर किए। 3 गोलियां उसे लगीं। दिनदहाड़े अचानक हुई इस घटना ने हर किसी को दहशत में डाल दिया। एकाएक फायरिंग की आवाज सुनकर लोग सहम गए। सभी इधर-उधर भाग निकले। फायरिंग के बाद भारी पत्थर से कुचला सिर गोली लगने पर अजय जमीन पर गिर गया। इस पर बदमाशों ने पास पड़े भारी पत्थर से उसके सिर पर बर्बरता पूर्वक कई वार किए। वार इतने तेज थे कि अजय का सिर करीब 5 इंच तक जमीन में धंस गया। अजय की मौत होने की संतुष्टि होने के बाद चारों बदमाश स्कूटी से फरार हो गए। सौरभ ने हमले की सूचना दोस्तों व अजय के परिजनों को दी। अजय यादव के बड़े भाई संजय यादव को वारदात की सूचना सवा एक बजे मिली। उनके परिचित नफीस मिस्त्री ने बताया कि उनके पास भगवान चौधरी का फोन आया है। आपके छोटे भाई पर सूतमील कॉलोनी में जान लेवा हमला हुआ है। इस पर संजय यादव घटनास्थल पर पहुंचे और अजय को एसएमएस हॉस्पिटल लेकर गए जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। संजय यादव ने बनीपार्क पुलिस थाने में केस दर्ज कराया। अजय पर दर्ज थे 10 केस अजय यादव (42) सदर थाने का हिस्ट्रीशीटर था। इसके खिलाफ पहले से 10 मुकदमे दर्ज थे। पहला मुकदमा 1997 में हत्या के प्रयास का सदर पुलिस थाने में दर्ज हुआ था। सदर पुलिस थाने में 7 सितंबर 2012 को अजय यादव की हिस्ट्रीशीट खोली गई थी। इसके बाद 2018 तक करीब 10 केस दर्ज हो गए। हालांकि 2018 के बाद एक भी केस दर्ज नहीं हुआ। वह सदर थाना इलाके में बडोदिया बस्ती में माता-पिता, पत्नी और दो बच्चों के साथ रहता था। हिस्ट्रीशीटर अजय यादव ने 2009 में वार्ड 36 से पार्षद का निर्दलीय चुनाव भी लड़ा था। चाय की थड़ी पर हुआ हमला पुलिस के अनुसार अजय 21 सितम्बर 2021 को करीब साढ़े 12 बजे अपनी स्कॉर्पियो से सूतमील कॉलोनी पहुंचा। दोस्त सौरभ उर्फ चिकूल के साथ घर से निकला था। वारदात के दिन अनिल चौधरी व सौरभ भी आए थे। अनिल चौधरी प्राइवेट काम करता है और सौरभ शर्मा मेडिकल दुकान चलाता है। दोनों ही अजय यादव के पड़ोसी थे। इस कारण इनमें अच्छी दोस्ती थी। चाय पीने के बाद अनिल चला गया। वहीं अजय अपने दोस्त सौरभ से बातचीत करने के लिए थोड़ी देर अपनी स्कॉर्पियो में रुका था। इसी दौरान उस पर हमला हो गया। केस के इंवेस्टिगेशन के लिए 4 टीमें फायरिंग की सूचना मिलने पर बनीपार्क पुलिस मौके पर पहुंची। घटनास्थल से पुलिस को 4 जिंदा कारतूस, 2 खाली कारतूस केस, 1 बुलेट और 1 खाली मैगजीन मिली। पुलिस की सूचना पर मौके पर पहुंची एफएसएल टीम ने इन्हें जब्त कर लिया। तत्कालीन एडिशनल पुलिस कमिश्नर अजयपाल लांबा, डीसीपी ऋचा तोमर, डीसीपी क्राइम दिगंत आनंद मौके पर पहुंचे। इस वारदात के बाद जयपुर पुलिस को अलर्ट कर दिया गया। पुलिस ब्लाइंड मर्डर की जांच में जुट गई। धरपकड़ के लिए ए श्रेणी की नाकाबंदी की गई। सीएसटी, डीएसटी सहित पुलिस थानों से दो इंस्पेक्टर और दो सबइंस्पेक्टर के नेतृत्व में 4 टीमों का गठन किया। बड़ा सवाल- किसने की अजय की रेकी, हत्यारे कौन ? सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल टावरों के बीटीएस डाटा जैसे तकनीकी सबूतों के आधार पर हत्यारे की तलाश शुरू हुई। अजय यादव से रंजिश रखने वाले संदिग्ध बदमाशों के बारे में भी जानकारी जुटाना शुरू कर दिया। पुलिस जांच में सामने आया कि इस सनसनीखेज हत्याकांड को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया था। जिस तरह से अजय की हत्या की गई, उससे ये साफ जाहिर था कि हत्या में शामिल चारों बदमाश तेज तर्रार, प्रोफेशनल और शार्प शूटर थे। पुलिस को हत्यारों के मोबाइल फोन का भी कोई सुराग नहीं मिला। बनीपार्क का सूतमील कॉलोनी का इलाका भीड़ भाड़ वाला क्षेत्र है। बिना रेकी और योजना के इस तरह की वारदात को अंजाम देना संभव नहीं था। अब पुलिस अजय की हत्या के मोटिव और रैकी करने वाले शख्स की जांच में जुट गई। पुलिस हर उस शख्स पर शक कर रही थी जो अजय से जुड़ा था। पुलिस गैंगवार के एंगल से भी जांच कर रही थी। कल पार्ट-2 में पढ़िए… किसने की अजय की हत्या और क्यों?

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