बाड़मेर वर्ष 2004 में जब रेगिस्तान के धोरों में तेल की खोज हुई तो लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इसके बाद 2009 में एमपीटी नागाणा से तेल उत्पादन शुरू हुआ, लेकिन अब करीब 20 साल बाद ये ही तेल उत्पादन वहां रहने वाले हजारों ग्रामीणों के लिए आफत बन गया है। नागाणा के आसपास करीब 250 से ज्यादा तेल कुएं है। इन तेल कुओं से 24 घंटे क्रूड उत्पादन हो रहा है। जमीन के अंदर करीब 1500- 1800 मीटर गहराई पर कई बार ब्लास्ट किए जाते हैं। अब इस इलाके में रहने वाले लोग डरे और सहमे हुए है। अब आए दिन हो रहे ब्लास्ट से मकानों, स्कूलों में दरारें आ चुकी है। कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, चेतावनी दी: मंगला वेलपेड क्षेत्र में ब्लास्टिंग एवं जल प्रदूषण को लेकर किसानों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान बांकाराम धतरवाल, रुघनाथराम सहित दर्जनों किसान मौजूद रहे। जोगासर कुआं में अस्पताल धमाकों के कारण जर्जर हो चुका है। बुधवार रात 11 बजे हुए धमाके से उप स्वास्थ्य केंद्र की छत का आधा मलबा नीचे गिर चुका है। राउप्रावि. जोगासर कुआं की स्कूल की दीवारों में भी दरारें आ गई है, जहां करीब 150 से ज्यादा बच्चे पढ़ रहे हैं। मोहनराम जाट ने इसी साल खेत में मकान बनाया है, जिसमें दरारें आ गई है। बाड़मेर. कुओं मेंनिकल रहा क्रूडयुक्त काला और बदबूदार पानी। नागाणा, जोगासर कुआं, बांदरा, चौखला सहित कई गांव एमपीटी नागाणा के इर्दगिर्द है। करीब 200 से ज्यादा किसानों के ट्यूबवैल है। जीरा-ईसबगोल की खेती कर रहे हैं। इनके कुओं से जब मोटर चलती है तो करीब आधा घंटा तक क्रूड जैसा काला पानी आता है, जो बदबूदार भी है। कई तरह की गैस होने के कारण जब पानी बहता है तो पास रहना भी मुश्किल होता है। वजह ये भी है कि जब आसपास तेल कुएं है, जहां क्रूड निकालने के बाद खराब पानी को वापिस जमीन के अंदर भेजा जाता है। यही पानी ट्यूबवैल के जरिए किसानों के खेतों में आ रहा है। सालों से परेशान किसानों के दर्द को सुनने वाला कोई नहीं है। मेरे ट्यूबवैल है, लेकिन 500 मीटर दूर वेलपेड है। वहां आए दिन धमाके होते हैं। क्रूड निकालने के लिए गंदा पानी जमीन में डालते हैं। कई तरह की गैस और क्रूड मिक्स पानी ट्यूबवैल से निकल रहा है, इससे हमारे खेत खराब हो गए है। बदबूदार पानी की वजह से फसलें जल गई है। उमाराम नाई, किसान, निवासी जोगासर कुआं।


