रायसेन जिले के वनगवां गांव में होली के अवसर पर ‘वीर बम बोल’ एक अनूठी परंपरा निभाई जाती है। यह सदियों पुरानी प्रथा धूलेंडी के दिन शाम 6 बजे से शुरू होती है, जिसमें मेघनाथ बाबा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस परंपरा के तहत, पूजा स्थल पर लगे दो लोहे के खंभों पर लगभग 25 फीट की ऊंचाई पर एक बकरे को बांधकर घुमाया जाता है। स्थानीय लोग मेघनाथ को ‘वीर बब्बों’ भी कहते हैं। आयोजन का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा युवाओं को कोड़े मारना है। यह प्रथा वीरों की पहचान के लिए शुरू की गई थी। माना जाता है कि जो युवा अपने गांव और समाज की रक्षा करेंगे, उन्हें कोड़े मारकर उनकी वीरता का एहसास कराया जाता है। इस दौरान कोड़े खाने वाले व्यक्तियों को कोई शारीरिक नुकसान नहीं होता और उनके शरीर पर चोट के निशान भी नहीं मिलते हैं। यह आयोजन हलारिया परिवार द्वारा किया जाता है बनगवा के जनपद सदस्य नितेश पटेल, मुन्नालाल गौर के अनुसार, यह परंपरा 100 वर्षों से भी अधिक समय से गांव में निभाई जा रही है। हलारिया कुर्मी पटेल परिवार विगत 100 वर्षों से मेघनाथ बाबा की पूजा-अर्चना करता आ रहा है। इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए वनगवां गांव के अलावा आसपास के करीब 10 गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। यह परंपरा अब वनगवां गांव की पहचान बन चुकी है। कार्यक्रम में अखिल भारतीय कुर्मी महासभा के जिला अध्यक्ष सीएल गौर, बनगवा के जनपद सदस्य नितेश पटेल, पूर्व सरपंच मुननूलाल गौर सहित कई गणमान्य व्यक्ति और ग्रामीण मौजूद रहे।


