भास्कर न्यूज| रायगड़ा उत्कल एल्युमिना बाफला माली खदान से प्रभावित ग्रामीणों और प्रशासन के बीच बुधवार (25 फरवरी) को हुई वार्ता विफल रही। बाफला माली प्रगति ऑर्गनाइजेशन ने प्रशासन पर एकतरफा निर्णय थोपने का आरोप लगाते हुए आंदोलन फिर से शुरू करने की चेतावनी दी है। बाफला माली खदान से प्रभावित चार ग्राम पंचायतों के लोग अपनी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी सीएसआर और डीएमएफ फंड से करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा तो करती है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और स्थानीय युवाओं को नियमित नौकरी जैसे बुनियादी मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है। 13 फरवरी से जारी 6 दिवसीय रोड ब्लॉक के बाद प्रशासन ने मध्यस्थता करते हुए आंदोलन रुकवाया था। 25 फरवरी को काशीपुर मुख्यालय में रायगढ़ा डिप्टी कलेक्टर और कंपनी अधिकारियों की मौजूदगी में बैठक हुई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासन ने उनकी 15 मांगों पर चर्चा करने के बजाय एकतरफा कार्रवाई की। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कंपनी प्रशासन को एक ढाल की तरह इस्तेमाल कर रही है ताकि उनकी जायज मांगों को दबाया जा सके। संगठन ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों का ठोस समाधान नहीं निकलता, वे माइनिंग रोड पर अपना विरोध प्रदर्शन और चक्काजाम फिर से शुरू करेंगे। ग्रामीणों ने दोटूक कहा है कि हक की लड़ाई अब और तेज होगी। बाफला माली प्रगति ऑर्गनाइजेशन कंपनी का कहना है कि अधिकारी बातचीत से बच रहे हैं और प्रशासन केवल खानापूर्ति कर रहा है। जब तक स्थानीय लोगों को रोजगार और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलतीं, आंदोलन जारी रहेगा।


