सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां शहीद बेदी पर 1 जनवरी को झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के लोगों का जुटान हुआ। यह जुटान 1948 के गोलीकांड में शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए हर साल आयोजित किया जाता है। पहली जनवरी को मनाए जाने वाले शहीद दिवस के अवसर पर खरसावां शहीद पार्क स्थित समाधि स्थल को भव्य रूप से सजाया गया है। शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, चंपाई सोरेन व मधु कोड़ा, मंत्री दीपक बिरुवा, आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो, गांडेय विधायक कल्पना सोरेन, सांसद जोबा मांझी सहित कई विधायक और राजनीतिक-सामाजिक संगठनों के दिग्गज नेता पहुंचेंगे। विभिन्न दलों और सामाजिक संगठनों ने 100 स्वागत द्वार बनाए शहीद दिवस कार्यक्रम के दौरान विधि-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए जगह-जगह जवानों की तैनाती की गई है। शहीद दिवस को लेकर खरसावां चांदनी चौक से सरायकेला, आमदा, कुचाई और हुड़गंदा मार्गों में विभिन्न दलों और सामाजिक संगठनों ने 100 स्वागत द्वार बनाए हैं। 1 जनवरी 1948 को हुआ था गोलीकांड खरसावां शहीद स्थल आजाद भारत के सबसे बड़े नरसंहारों में से एक का गवाह है। 1 जनवरी 1948 को खरसावां रियासत को ओडिशा से अलग करने की मांग को लेकर एक सभा आयोजित की गई थी। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए तत्कालीन ओडिशा मिलिट्री ने गोलियां चलाई, जिसमें कई लोग मारे गए। हालांकि, इस गोलीकांड में मारे गए लोगों का स्पष्ट आंकड़ा आज तक सामने नहीं आ सका है। तब से लेकर आज तक, हर साल 1 जनवरी को खरसावां शहीद स्थल पर लोग जुटते हैं और अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।


