खरोरा हादसे में अपनों को खोने का दर्द:पिता बोले- बाइक से ले जाता तो बेटा बच जाता, एक परिवार के 7 समेत 13 मौतें

मेरा बेटा एकलव्य (6 साल) मेरे साथ बाइक से घर आना चाहता था। मैंने उससे कहा नहीं मम्मी के साथ आना। इसके बाद रात करीब 10 बजे मैं और परिवार के कुछ लोग बाइक से चटौद आ गए। डेढ़ घंटे बाद खबर आई कि जिस माजदा से मेरा परिवार लौट रहा था, उसका एक्सीडेंट हो गया। मैं तुरंत मौके पर पहुंचा। चारों तरफ लाशें थीं। बॉडी पार्ट्स इधर–उधर बिखरे थे। मैंने लाशों को पलट–पलटकर देखना शुरू किया। पहला शव जो हाथ में आया वो मेरे बेटे का था। ये कहते हुए विक्रम साहू बिलख–बिलखकर रोने लगे। मोहंदी गांव के मुक्तिधाम में उनके बेटे की कब्र के बगल में तीन और चिताएं जलीं। ये विक्रम की मां, चाची और भाभी की थी। खरोरा सड़क हादसे में 13 लोगों की मौत हुई। जान गंवाने वाले 7 विक्रम के ही परिवार के हैं। इनमें 4 माह के भांजे और 4 साल की भांजी भी शामिल है। बाकी 6 दूर के रिश्तेदार हैं। भास्कर की टीम इस गमगीन माहौल के बीच मृतकों के गांव पहुंची, अपनों को खो चुके परिजनों ने क्या कहा पढ़िए इस रिपोर्ट में:- मोहंदी में मातम, सप्ताह भर पहले ही पीड़ित परिवार के यहां हुई थी शादी सोमवार दोपहर करीब दो बजे हम मोहंदी पहुंचे। पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ था। पता चला कि सभी लोग श्मशान घाट गए हुए हैं। हम भी मौके पर पहुंचे। यहां मौजूद सभी की आंखें नम थीं। लोग आपस में हादसे के बारे में ही बात कर रहे थे। स्थानीय विधायक अनुज शर्मा भी मौके पर पहुंचे। एक ग्रामीण ने बताया कि सप्ताह भर पहले ही विक्रम के छोटे भाई दुर्गेश (चाचा का बेटा) की शादी हुई थी। विक्रम की पत्नी सदमे में, आंखों के सामने 6 साल के बेटे ने तोड़ा दम पूरे गांव में खुशियां थी। छठी के बाद पूरे मेहमान भी वापस नहीं लौटे थे। इस बीच ये हादसा हो गया। विक्रम ने बताया कि परिवार के करीब 20 लोग छठी के कार्यक्रम में चटौद से बाना गए थे। मैं और घर के कुल 13 लोग अलग-अलग बाइक से गए थे। महिला और बच्चे माजदा (मिनी ट्रक) से गए। हादसे में सिर्फ मेरी पत्नी मनीषा ही बची। जो सदमे में हैं। मनीषा के सामने ही उसके 6 साल के बेटे ने दम तोड़ दिया। चटौद में सास-बहू समेत तीन लोगों की मौत मोहंदी से कुछ आठ-दस किलोमीटर दूर चटौद गांव हैं। इसी गांव में साहू समाज के लोग छठी कार्यक्रम में शामिल होने बाना के लिए निकले थे। इस गांव से सास–बहू समेत तीन महिलाओं की हादसे में मौत हुई है। जब तक हम पहुंचे तीनों का अंतिम संस्कार किया जा चुका था। इसके बाद हम गांव के भीतर गए, शोक पत्र बांट रहा एक ग्रामीण हमें पीड़ित परिवार के घर लेकर गया। पत्नी के इंतजार में रातभर आंगन में सोए, दूसरे दिन शव घर पहुंचा हादसे में पत्नी और बहू को खोने वाले मोतीराम साहू ने बताया कि कुंती (पत्नी) से आखिरी बार फोन पर बातचीत हुई थी। उसने बोला था कि कार्यक्रम से देर रात तक वापस लौटेंगे। आप सो जाना। इसके बाद मैं आंगन में ही सो गया। नींद नहीं आ रही थी। सोचा था, बहू और पत्नी आएंगे तो दरवाजा खोल दूंगा। हादसे की जानकारी मुझे रात को ही लग गई थी। मुझे बताया गया था कि कुंती और बहू टिकेश्वरी सेफ हैं। कीर्ति के बच्चों का इलाज चल रहा है, उन्हें मां के मौत की खबर नहीं कीर्ति के हर्षित (5 साल) और (भव्य) 3 साल के दो छोटे बच्चे हैं। ये दोनों भी मां और दादी के साथ छठी के कार्यक्रम में बाना गए हुए थे। दोनों को हादसे में चोट आई है। रायपुर के डीकेएस में इलाज चल रहा है, फिलहाल खतरे के बाहर हैं। इन दोनों को नहीं मालूम कि इनकी मां का देहांत हो गया है। मोतीराम कहते हैं कि सब कुछ समाप्त हो गया। समझ नहीं आ रहा बच्चों को आगे क्या बताएंगे, क्या कहेंगे, कैसे संभालेंगे? मां की मौत, दूसरे की गोद में था दुधमुंहा बच्चा इसलिए जान बची मोतीराम के घर के बगल में ही बीरझा साहू (60साल) का घर है। ये भी उस माजदा में सवार थी, जिसका एक्सीडेंट हुआ। बहू भी साथ ही बैठी हुई थी। बीरझा बताती हैं कि माजदा और ट्रेलर की टक्कर के बाद बहुत सारे लोग दूर जा गिरे। मेरे सामने मेरी बहू कीर्ति साहू (37 साल) बैठी हुई थी। वो सड़क किनारे खेत में जा गिरी। थोड़ी देर में बहू को एम्बुलेंस में डालकर ले गए। मंदिर हसौद, खरोरा और बेरला में तीन लोगों का अंतिम संस्कार हादसे में महिमा साहू(18साल), वर्षा साहू(27 साल) और राजबती साहू (60साल) इन तीन महिलाओं की भी मौत गई। तीनों का अंतिम संस्कार खरोरा, बेरला और मंदिरहसौद में किया गया। मिनी ट्रक-ट्रेलर हादसे की तस्वीरें देखिए..

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