नमस्कार खाटूश्यामजी के दरबार में हाजिरी देने मंत्री-नेता, अधिकारी, अभिनेता-खिलाड़ी सब सीकर पहुंचे। मंत्रीजी ने स्कूली बच्चियों के साथ चौराहे पर खड़े होकर ट्रैफिक नियमों पर बात की। लद्दाख के सोनम वांगचुक की रिहाई के लिए राजस्थान-हरियाणा के लोगों ने रैली निकाली। बीकानेर में तेल लूटने की होड़ लग गई। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. खाटू नगरी में भक्ति के रंग भक्ति के रंग देखने हैं तो कभी खाटू के दरबार चले जाइये। बड़े-बड़े मंत्री आकर दहलीज पर साथिया मांढ रहे हैं। जिनका डंका बजता है, ऐसे नेता हाथ जोड़कर चले आ रहे हैं और सिर पर मोरपंख से आशीर्वाद पा रहे हैं। जिन खिलाड़ियों के बल्ले का खौफ पर्थ से लेकर मुल्तान तक रहा, वे भी बाबा की एक झलक पाने को बेताब। कोई रेंगकर पहुंचता दिखा, बोला-बाबा लेने आएंगे। कोई कीलों पर लेटता हुआ आया। किसी की कमर सीधी नहीं, लेकिन चाल बिल्कुल सीधी-बाबा के दरबार की तरफ। कोई जंजीरों में बंधकर पहुंच रहा है तो कोई गुलाबों का गुच्छा लेकर दूर से ही प्रेम का सा इजहार कर रहा है- बाबा आई लव यू। कोई तो बाबा से ही सवाल-जवाब कर रहा है- हम को बतलाओ (जयश्री श्याम), तुम इतना सुंदर (जयश्री श्याम), अरे कैसे दिखते? (जयश्री श्याम).. 2. मंत्रीजी चौराहे पर, ट्रैफिक नियम सिखाए खेल मंत्रीजी बच्चों के बीच खूब नजर आ रहे हैं। खास तौर पर स्कूली बच्चों को मोटिवेशन देते अक्सर दिखाई देने लगे हैं। जयपुर में एक चौराहे पर नजर आ गए। साथ में स्कूल की छात्राएं। मंत्रीजी और छात्राओं ने ट्रैफिक पुलिस वाला ओरेंज जैकेट पहना है। मंत्रीजी छात्राओं से पूछते हैं- पहले कभी ट्रैफिक मैनेज किया है? छात्राएं समवेत स्वर में कहती हैं- नहीं सर। मंत्रीजी फिर पूछते हैं- कभी ऐसा हुआ कि आपने निर्देश दिया और वाहन चालकों ने नहीं सुना। लड़कियां शिकायत के लहजे में कहती हैं- ऐसे बहुत लोग हैं। वाहन को स्टॉप लाइन पर ले आते हैं। मंत्रीजी ने पूछा- और बिना हेलमेट? लड़कियां बोलीं- ऐसे तो बहुत हैं। वे बत्ती होने से पहले ही भाग जाते हैं। मंत्रीजी को बत्ती पर बिना हेलमेट एक बाइक सवार नजर आ गया। उन्होंने हेलमेट का इशारा किया तो बाइक सवार मुस्कुराने लगा। मंत्री महोदय का ध्यान शायद बाइक सवार की लाइट पर नहीं गया। उस पर नीला-लाल निशान यानी पुलिस का स्टीकर लगा था। 3. सोनम वांगचुक के लिए जोधपुर में प्रदर्शन बहुत पहले किसी ने 10 के नोट पर लिख दिया था- सोनम बेवफा है। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं। उन्होंने बहुत खोज-बीन के बाद कहा कि लद्दाख में एक सोनम है जो बेवफा है। वह लद्दाख में एंटी-नेशनल एक्टीविटी कर रहा है। फिर क्या था, ‘सोनम बेवफा है’ के गुप्त मैसेज को डिकोड कर लिया गया और सोनम वांगचुक को उठाकर जेल में डाल दिया गया। लेकिन चूंकी लोगों ने थ्री इडियट कई बार देखी थी। उन्हें फिल्म में सोनम का ‘पेपर लीक’, ‘डमी कैंडिडेट’ और एक वाहन पर तीन सवारी वाला अपराध तो समझ आया, लेकिन देशविरोधी गतिविधि नहीं दिखी। लिहाजा लोग जोधपुर जेल के बाहर जुट गए और बोले कि सोनम वांगचुक को रिहा कर दो। 4. चलते-चलते… बीकानेर में ऑयल से भरा टैंकर पलट गया। फ्री का माल बह रहा था। ऐसे में लोग बाल्टी डिब्बा जो हाथ लगा वो लेकर पहुंच गए और लूट मचा दी। अब आप कहेंगे कि तेल तो वैसे भी बेकार बह रहा था। लूट लिया तो क्या गलत किया? काम ही आएगा। काम तो आएगा, लेकिन सोचिए कि एक चिंगारी से यहां क्या हो सकता था। लालच ने ही तो भिवाड़ी में गरीब मजदूरों के चीथड़े उड़ा दिए। जान से बढ़कर कुछ नहीं है। तेल कितना ही मंहगा हो जाए, जिंदगी से ज्यादा कीमती तो नहीं हो सकता। जो लोग बाल्टियां लेकर भाग रहे हैं, वे बचपन में पढ़ा पाठ भूल गए- लालच बुरी बला। इनपुट सहयोग- सुरेंद्र माथुर (सीकर), अनुराग हर्ष (बीकानेर), अरविंद सिंह (जोधपुर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब मंगलवार सुबह 7 बजे मुलाकात होगी..


