अगर आपके घर में डाइनिंग टेबल नहीं है, या वह सिर्फ नाम की है और खाना अक्सर सोफे, पलंग या जमीन पर बैठकर खाया जाता है, तो हैरान मत होइए। आप अकेले नहीं हैं। दुनिया के कई विकसित और अमीर देशों में भी यही ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। फर्नीचर निर्माता आइकिया की ‘कुकिंग एंड ईटिंग रिपोर्ट 2026’ में यह चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। 31 देशों के 31 हजार से ज्यादा लोगों पर किए गए इस वैश्विक सर्वे में खाने-पीने की आदतों, विचित्रताओं और बदलती जीवनशैली की झलक मिलती है। यह रिपोर्ट बताती है कि खाने का तरीका अब सिर्फ पेट भरने तक सीमित नहीं रहा। यह आदतें जीवनशैली, भावनाओं और पारिवारिक संबंधों का आईना बन चुका है। भारत में भले ही डिनर का टाइम देर रात का हो, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में औसतन लोग शाम 6:44 बजे तक डिनर खत्म कर लेते हैं। अधिकतर लोग 27 मिनट में खाना खा लेते हैं। 5% लोग तो 10 मिनट या उससे कम समय में ही खाना खत्म कर देते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जितने ज्यादा सम्पन्न लोग होंगे, खाना खाने में उतना ज्यादा समय लगेगा। हर देश में अलग है खाने को लेकर पसंद-नापसंद – 40% लोग परिवार के साथ टीवी देखते हुए खाना खाते हैं।
(ब्रिटेन में लोगों के पास डाइनिंग टेबल न होने की संभावना 3 गुना अधिक है।)
– 55% जर्मनीवासी खाना बर्बाद न हो इसलिए बासी (एक दिन पहले का) भोजन भी खा लेते हैं।
– 27% भारतीयों के लिए खाना पकाना प्रेम की अभिव्यक्ति है। यह फ्रांस से 3 गुना ज्यादा है।
– 40% लोग ऐसा भोजन पसंद करते हैं जिससे उनकी बचपन की यादें जुड़ी हों।
– 20% लोग डिनर में लगभग हर बार एक जैसी डिश खाते हैं।
– 20% लोगों को आधी रात में कुछ न कुछ स्नैक चाहिए होता है।
– 46% लोग मीठा बहुत पसंद करते हैं, जबकि चीन में यह आंकड़ा 64% तक है। यानी चीन के भोजन में मीठा होना जरूरी है।
(दुनियाभर में लोग औसतन सप्ताह में 5 बार खाना पकाते हैं।)


