भास्कर न्यूज | भरतपुर राजस्थान स्टेट रोडवेज एम्पलॉईज यूनियन (एटक) के प्रदेशव्यापी आह्वान पर सोमवार को भरतपुर और लोहागढ़ आगार के कर्मचारियों ने अपनी ज्वलंत मांगों को लेकर हुंकार भरी। केंद्रीय बस स्टैंड पर आयोजित दो दिवसीय धरने के पहले दिन कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने राज्य सरकार और रोडवेज प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार उनके धैर्य की परीक्षा ले रही है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यूनियन के नेताओं ने बताया कि 2 फरवरी को प्रबंध निदेशक को ज्ञापन सौंपने के बावजूद अब तक प्रशासन ने वार्ता के लिए कोई पहल नहीं की है। प्रबंधन के इसी अड़ियल रवैये के विरोध में सोमवार को भरतपुर की दोनों इकाइयों के कर्मचारी लामबंद हुए। इस दौरान संयुक्त कर्मचारी महासंघ के महामंत्री राजेंद्र शर्मा ने भी धरने को संबोधित कर अपना समर्थन दिया। वक्ताओं ने संचालन व्यवस्था, भर्ती, वेतन, पदोन्नति और पेंशन से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए। कर्मचारियों ने नई 2500 बसों की खरीद के साथ बस संचालन वर्ग में कम से कम 50% रिक्त पदों पर भर्ती की मांग की है और अनुबंध पर कार्यरत चालकों को प्राथमिकता देने को कहा है। महिला कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव देने, 12–15 घंटे की ड्यूटी पर रोक लगाने और वैकल्पिक कार्य लेकर वेतन रोकने की प्रथा खत्म करने पर जोर दिया गया है। मेडिकल प्रमाण पत्र के अभाव में रोके गए वेतन का तत्काल भुगतान, वार्षिक अवकाश की स्पष्ट गणना और अतिरिक्त कार्य के आधार पर ओवरटाइम भुगतान की मांग भी उठाई गई है। साथ ही पेंशनर्स के संशोधन, डीपीएस मामलों के निस्तारण, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के भुगतान और वरिष्ठ पेंशनर्स को अतिरिक्त लाभ देने के आदेश जारी करने की मांग की गई है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि समाधान नहीं होने पर आंदोलन तेज किया जाएगा। इस दौरान एटक के पदाधिकारियों ने कहा कि ड्राइवरों से 10-12 घंटे ड्यूटी कराई जा रही है। रेस्ट भी नहीं दिए जा रहे हैं। इससे कर्मचारी बीमार हो रहे हैं। इसके अलावा रोडवेज बस स्टैंड का जल्द से जल्द निर्माण कराए जाने की मांग की। वार्ता नहीं तो आंदोलन होगा और तेज:- एटक के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह सोलंकी और शाखा सचिव रूपेंद्र सिंह फौजदार ने कहा कि रोडवेज प्रशासन कर्मचारियों की जायज मांगों को नजरअंदाज कर रहा है। प्रदेश नेतृत्व ने पहले ही आगाह किया था, लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। यदि 17 फरवरी के धरने के बाद भी सकारात्मक रुख नहीं अपनाया गया, तो आगामी दिनों में प्रदेशव्यापी रणनीति बनाकर आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और अधिक उग्र किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।ज़ वेतन ग्रेड एवं पदोन्नती की मांग:- आर्टिजन ग्रेड-2 को पदोन्नति पर उच्च वेतन ग्रेड देने और नॉन-आईटीआई कर्मचारियों के लिए आगे पदोन्नति के अवसर खोलने की मांग भी शामिल है। धरने के दौरान नीरज चौधरी, सत्यवीर डागुर, दौलत सिंह, पुष्पेंद्र सिंह फौजदार, मोरध्वज सिंह, लोकेश सोलंकी, सुल्तान सिंह, सत्यवीर सिंह, लोकेंद्र सिंह, हितेश शर्मा, देवीलाल, अतर सिंह जाटव और त्रिवेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे। इनके अलावा एसोसिएशन के शुमरण सिंह, हरिचरण दुबे, दिनेश चंद्र शर्मा, भरत सिंह और रामकिशन एमपी जैसे वरिष्ठ साथियों ने भी विरोध प्रदर्शन में शिरकत कर एकजुटता दिखाई।


