खुहड़ी-म्याजलार इलाके में बकरियों की मौत:डॉक्टर बोले- फड़किया रोग से हो रही मौतें, पशुपालन विभाग लगा रहा टीके

जैसलमेर के खुहड़ी व म्याजलार इलाके में पशुओं की मौतों का सिलसिला जारी है। मानेरी गांव में 3 पशुपालकों की करीब 12 बकरियों की मौत हुई है। वहीं म्याजलार के बांकीदास की ढाणी में ही कई बकरियों की मौत हुई है। हालांकि पशुपालन विभाग ने पशुओं में टीका लगाने का काम किया है। मगर कई जगह अभी भी पशुओं के मरने का सिलसिला जारी है। पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. उमेश व्रेंगटिवार ने बताया- पशुओं में फड़किया नामक रोग फैला है। पशुपालन विभाग पशुओं को टीके लगा रहा है ताकि बीमारी और ना फैले। उन्होंने बताया कि जुलाई-अगस्त के बाद पशुओं में टीके लगाए जाते हैं। मगर कई पशुपालक टीके नहीं लगाते हैं जिससे सर्दियों में पशुओं में बीमारी आ जाती है। हालांकि विभाग की टीमें मुस्तैदी के साथ टीकाकरण का काम कर रही है। अब तक सैकड़ों पशुओं की हो चुकी है मौत जिले के खुहड़ी, मानेरी, म्याजलार समेत कई इलाकों में सैकड़ों की संख्या में बकरियों व भेड़ों की मौत हुई है। पशुपालकों का कहना है कि पशु खड़े खड़े गिरते हैं और उनकी मौत हो जाती है। ऐसे में कई पशुओं की मौत से पशुपालक परेशान है। कई पशुपालकों की रोजी का जरिया ही पशुओं पर निर्भर है। ऐसे में उन पर रोजी-रोटी का संकट आ खड़ा हुआ है। पशुपालक अमर सिंह ने बताया- पहले तो पशु पालन विभाग को भी बीमारी का पता नहीं चला। मेडिकल टीमें भी मौके पर आई और सैंपल लेकर गई मगर पशुओं में मौतों का सिलसिला नहीं थमा। अब पशुपालन विभाग टीके लगा रहा है। फड़किया रोग से मौतें, टीकाकरण जारी पशुओं के मौतों के मामले में जानकारी देते हुए पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ उमेश व्रेंगटिवार ने बताया- पशुओं में फड़किया नामक रोग फैला है। हमारी टीम मौके पर जाकर पशुओं में टीकाकरण कर रही है। पहला टीके लगने के बाद दूसरा टीका 14 दिन बाद लगता है। उन्होंने बताया कि जुलाई-अगस्त के बाद पशुओं में टीके लगाए जाते हैं, ताकि बीमारी से पशुओं की मौत ना हो। मगर उस दौरान पशुओं की स्थिति सही होने पर कई पशुपालक टीके नहीं लगाते हैं जिससे सर्दियों में अगर बीमारी फैलती है तो मौतें होती है। फिलहाल विभाग की टीमें मुस्तैदी के साथ टीकाकरण का काम कर रही है। क्या है फड़किया बीमारी
पशुओं में फड़किया (एन्टेरोटोक्सिमिया) बीमारी के लक्षण है। सर्दियों में होनी वाली इस बीमारी में हांफनी होना, बुखार आना, चरना (खाना) पीना बंद और जुगाली बंद करना ऐसे लक्षण देखने को मिलते है। ये लक्षण दिखाई देने पर एक दो दिन में इनकी मौत हो जाती है। इसमें बचाव के तौर पर जुलाई-अगस्त महीने के समय पशुओं में टीके लगाने होते हैं। मगर पशु के सही होने की दशा में ज्यादातर पशुपालक टीकाकरण नहीं करवाते हैं।

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