राज्य वृक्ष खेजड़ी की अवैध रूप से कटाई पर 1961 से प्रतिबंध है। उसके बाद भी सोलर प्लांट लगाने के लिए खेजड़ी काटने का काम धड़ल्ले से चल रहा है। पिछले एक साल की बात करें तो बीकानेर जिले में ही लगभग 10 हजार खेजड़ी के पेड़ काटे जा चुके हैं, लेकिन उन्हें रोका नहीं जा सका। बड़ा सवाल ये है कि अब खेजड़ी की कटाई कैसे रोक पाएगा जिला प्रशासन? जिले में सोलर प्लांट लगाने के लिए पिछले एक साल में खेजड़ी के लगभग दस हजार पेड़ काटे जा चुके हैं। यह आंकड़ा पटवारियों और वन विभाग की उन मौका फर्द रिपोर्ट्स का है, जिन पर उपखंड कोर्ट में टेनेंसी एक्ट के तहत केवल जुर्माना वसूला गया है। हालांकि यह संख्या कई गुना अधिक होगी, क्योंकि अधिकांश मामलों में पटवारी या वन कर्मी पहुंच ही नहीं पा रहे हैं। हाल ही में खेजड़ी बचाओ आंदोलन चला। हजारों पर्यावरण प्रेमी 11 दिन तक महापड़ाव पर बैठे रहे। आंदोलन खत्म करने के लिए सरकार ने राजनीतिक पैंतरे अपनाए। प्रतिनिधिमंडल राजस्व सचिव की ओर से सभी कलेक्टर्स को जारी आदेश लेकर आया, जिसकी अंतिम पंक्ति कहती है, ‘सरकार खेजड़ी संरक्षण एवं अवैध कटाई नहीं होने देने के प्रति पूर्णत: संकल्पित है। अतः इस क्रम में प्रभावी कार्यवाही करें।’ जबकि काश्तकारी अधिनियम 1965 और राजस्थान वन अधिनियम 1953 भी यही बात कहते हैं। फिर भी एक और आदेश जारी हो गया, लेकिन यहां सवाल कलेक्टर से है कि वे खेजड़ी की कटाई कैसे रोकेंगी? भास्कर ने कलेक्टर नम्रता वृष्णि को फोन, व्हाट्सऐप पर मैसेज और मेल भी किया, मगर रात तक जवाब नहीं आया। फिलहाल उपखंड मुख्यालयों को आदेश का इंतजार है। भास्कर इनसाइट- जल्दी लाना होगा कानून, क्योंकि 70% सोलर प्लांट आना बाकी खेजड़ी के पेड़ों की कटाई रोकने के लिए केवल एक आदेश जारी करना ही काफी नहीं है। सरकार को इसके लिए जल्दी ही कड़ा कानून लाना होगा। एक्सपर्ट के अनुसार नए कानून में केवल जुर्माना राशि बढ़ा देने से काम नहीं चलेगा। सजा का प्रावधान करना होगा। इसके साथ ही ऐसी तकनीक पर जोर देना होगा, जिससे विकास भी न रुके और पेड़ भी न कटें। राइजिंग राजस्थान में 19 लाख करोड़ से अधिक के एमओयू केवल एनर्जी क्षेत्र में हुए हैं। अभी बड़ी संख्या में सोलर प्लांट लगने बाकी हैं। जमीनी हकीकत ये है कि लाखों रुपए के ठेके पेड़ काटने के हो रहे हैं। इससे पेड़ माफिया पनप गए हैं। खेजड़ी काटने के परिवाद और दर्ज मुकदमे
पटवारी की रिपोर्ट पर दायर परिवाद – छत्तरगढ़ 23, श्रीडूंगरगढ़ 10, पूगल 8, खाजूवाला 2, कोलायत-गजनेर 14, बज्जू 6, बीकानेर एसडीएम कोर्ट में 10 पुलिस थानों में केस – छत्तरगढ़ 8, श्रीडूंगरगढ़ 4, जामसर 6, नाल 9, गजनेर 6, कोलायत 2, पूगल 4, बज्जू 2, लूणकरणसर 3, नोखा 2 नोट : पर्यावरण प्रेमी 60 से ज्यादा परिवाद थाने में दे चुके हैं, लेकिन केस 48 ही दर्ज हुए। प्रशासन को एक हजार से ज्यादा ज्ञापन दिए जा चुके हैं। कलेक्टर के पास कटाई रोकने का अधिकार नहीं : रविंद्र सिंह भाटी
खेजड़ी पर प्राइवेट बिल पेश करने वाले शिव क्षेत्र से विधायक रविंद्र सिंह भाटी का कहना है कि सरकार ने सोलर कंपनियों से एमओयू किया है और उन्हें जमीन भी दी है। वहां कलेक्टर किस अधिकार से खेजड़ी की कटाई रोक सकेंगे। यदि सरकार सही मायने में खेजड़ी बचाना चाहती है तो अनुच्छेद 213 के तहत अध्यादेश लाना होगा। “सभी पटवारियों को फील्ड में रहने के लिए पाबंद कर रखा है। सोलर प्लांटों पर उन्हें निरीक्षण करने के निर्देश दे रखे हैं। दर्ज परिवादों पर टेनेंसी एक्ट में कार्यवाही जारी है। राजस्व सचिव के आदेश सोशल मीडिया पर देख लिए हैं।”
-दिव्या बिश्नोई, एसडीएम, पूगल “राजस्व विभाग के आदेश तहसील स्तर तक नहीं पहुंचे। कलेक्टर की ओर से कोई कार्ययोजना जारी नहीं की गई है, जिससे खेजड़ी की कटाई को रोका जा सके। 2019 से अब तक लाखों पेड़ प्रदेश में कट गए। किसी ने नहीं रोका।”
-मोखराम धारणिया, अध्यक्ष, जीव रक्षा संस्था “खेजड़ी की कटाई रोकने के लिए हमने हर गांव में पर्यावरण प्रेमियों के दल बनाए हैं। सूचना मिलने पर हमारा उड़न दस्ता मौके पर पहुंच जाएगा। अब पुलिस थानों में केस भी दर्ज कराएंगे।”
-रामगोपाल बिश्नोई, संयोजक, पर्यावरण संघर्ष समिति


