खेजड़ी बचाओ आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहा। बिश्नोई धर्मशाला के आगे क्रमिक अनशन पर सौ से ज्यादा पर्यावरण प्रेमी बैठे है। आंदोलन को समर्थन देने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश चौधरी बीकानेर आए। उन्होंने कहा कि खातेदारी का अधिकार कानून के तहत किसान को उस जमीन का अधिकार मिल गया, जहां वो मजदूरी करता था। खेजड़ी को उसी अधिनियम में किसान की संपत्ति बताया गया था। चौधरी ने कहा कि दिल्ली और जयपुर में अधिकारी से बात करते हैं तो वो कहते हैं कि एक के बजाय दूसरी खेजड़ी का पेड़ लगा दो। उन्हें नहीं पता कि एक खेजड़ी को तैयार करने में साठ साल लग जाते हैं। एक जीवन में कोई खेजड़ी का पेड़ नहीं लगा सकता। ऐसे में जिस खेजड़ी को काटा गया है, उसे वापस लगाने में पूरा जीवन निकल जाता है। उन्होंने कहा कि ये पेड़ नहीं है, बल्कि हमारी जीवन शैली है। चौधरी सुबह विमान से बीकानेर के नाल एयरपोर्ट पहुंचे थे, जहां से महापड़ाव स्थल पर पहुंचे। मुख्यमंत्री प्रस्ताव से असंतुष्ट है नेता धरना स्थल पर बैठे आंदोलन से जुड़े नेताओं ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के आश्वासन के बाद भी महापड़ाव समाप्त नहीं किया है। आंदोलन से जुड़े रामगोपाल बिश्नोई का कहना है कि जब तक कानून नहीं बनेगा, तब तक महापड़ाव और क्रमिक अनशन का सिलसिला जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि संभागीय आयुक्त के आश्वासन से कोई हल नहीं निकलेगा। हमारे संतों ने जयपुर में राजस्व सचिव से आदेश जारी करवाने के लिए आग्रह किया था।


