खेत में मशीन समेत पानी में समा गया ट्रक:तालाब बन गया किसान का खेत, प्रशासन ने केयर्न एनर्जी की से किया संपर्क

जैसलमेर के मोहनगढ़ इलाके में शनिवार को ट्यूबवेल की खुदाई में फटी जमीन के मामले में पानी का बहाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बीती रात पानी में फंसा ट्रक मशीन समेत जमीन में समा गया। खेत में चारों तरफ कीचड़ के साथ साथ पानी का तालाब बन गया है। हालांकि बीती रात तेल-गैस की कंपनी ओएनजीएस के अधिकारी मौके पर आए और जमीन से निकल रही गैस की जांच की। मोहन गढ़ के उप तहसीलदार ललित चारण ने बताया- ओएनजीसी के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और बोरवेल से निकलने वाली गैस को समान्य बताया। उन्होंने बताया कि ये गैस ना तो जहरीली है और ना ही ज्वलनशील है इसलिए घबराने कि कोई बात नहीं है। अब प्रशासन ने बाड़मेर स्थित केयर्न एनर्जी (वेदांता) की टीम से संपर्क किया है। अब उनकी टीम इस बहते पानी को रोकने के प्रयास करेगी। 850 फीट बोरवेल की खुदाई के दौरान फटी जमीन गौरतलब है कि शनिवार सुबह मोहनगढ़ के चक 27 बीडी के तीन जोरा माइनर के पास मोहनगढ़ के भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष विक्रम सिंह के खेत में सुबह करीब 10 बजे करीब बोरवेल की खुदाई की जा रही थी। करीब 850 फीट खुदाई के बाद अचानक तेज प्रेशर के साथ पानी निकलने लगा। पानी की धारा जमीन से 4 फीट ऊपर तक उठकर गिरने लगी। पानी के प्रेशर के कारण मौके पर बड़ा गड्ढा बन गया। इस दौरान मौके पर बोरवेल की खुदाई कर रही 22 टन वजन की मशीन ट्रक के साथ गड्ढे में धंस गई। यह देखकर बोरवेल मशीन पर काम कर रहे कर्मचारी और ग्रामीण मौके से दूर भाग गए। लोगों ने इसकी सूचना पुलिस और प्रशासन के साथ भूजल विभाग को दी तो अधिकारी मौके पर पहुंचे। ट्रक मशीन समेत समाया जमीन में मोहनगढ़ उप तहसीलदार ललित चारण ने बताया- बीती रात अचानक पानी का बहाव बहुत तेज हो गया था। ऐसे में ट्रक मशीन समेत जमीन में चला गया। मौके पर चारों तरफ कीचड़ और पानी जमा हो गया है। खेत में भी तालाब बन गया है। हालांकि प्रशासन ने एहतियातन खेत को व आसपास का 500 मीटर एरिया खाली करवा दिया है। लेकिन फिर भी पानी के बहाव को कम करने के लिए प्रयास जारी है। प्रशासन ने केयर्न एनर्जी से बाड़मेर में संपर्क किया है। अब उनकी टीम आएगी और पानी के बहाव को कम करने के साथ साथ बोरवेल को बंद आदि करने का प्रयास करेगी। आठ से 10 फीट उठ रही जलधारा भू जल वैज्ञानिक डॉ नारायण दास इणखिया ने बताया- यहां निकले जल का इतना दबाव है की यहां समुद्र की लहरों की तरह आठ से दस फीट ऊंचाई तक पानी बहने लगा। लगातार बहते पानी से किसान के खेत में पानी का भराव होना शुरू हो गया। हालांकि यहां बालू मिट्टी होने से जल भराव की गहराई अधिक नहीं रही। भू जल वैज्ञानिक डॉ नारायण दास इणखिया नें बताया की यहां निकल रहा पानी भू जल विज्ञान की भाषा में आरटेसियन कंडीशन के कारण निकल रहा है। यहां पर जल को सहेजने वाली भू वैज्ञानिक परत सैंड स्टोन, चिकनी मिटटी की मोटी परत से कन्फाइंड कंडीशन में दबी हुईं है। जैसे ही लगभग 200 मीटर मोटी इस परत को पार कर मूल जल परत को पंचर किया जाता है तब पानी अत्यधिक दबाव के कारण ऊपर की तरह बहने लगता है। यह स्थिति मोहनगढ़ व नाचना पंचायत समिति के कई स्थानों पर पूर्व में भी देखी जा चुकी है। 850 फीट गहरे बोरवेल की खुदाई के दौरान फूटी जलधारा:नदी की तरह बहने लगा पानी; बड़ा गड्ढा बनने पर धंसा मशीन लगा ट्रक

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