झारखंड में हॉकी का विकास कैसा हो रहा है? -रांची और झारखंड में लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट हो रहे हैं। अभी एचआईएल हो रहा है। इन टूर्नामेंट में यहां के खिलाड़ियों को खेलने का मौका मिल रहा है। नए खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों का खेल देख रहे हैं। इससे स्थानीय खिलाड़ी प्रोत्साहित होंगे। उनमें बेहतर करने की ललक बढ़ेगी। वैसे झारखंड से बेहतर खिलाड़ी निकल कर आ रहे हैं। उन्हें वरिष्ठ खिलाड़ियों का सपोर्ट भी मिल रहा है। रांची | भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान और हॉकी में झारखंड की पहली महिला अर्जुन अवार्डी सलीमा टेटे इस सम्मान की घोषणा के बाद पहली बार रांची पहुंचीं। वे यहां 12 जनवरी से शुरू हो रही वीमेंस एचआईएल में सुरमा हॉकी क्लब की ओर से खेलेंगी। इस दौरान भास्कर रिपोर्टर क्रांतिदीप ने उनसे खास बातचीत की। उन्होंने कहा-हॉकी हो या कोई अन्य खेल या फिर पढ़ाई, जो भी कर रहे हैं, दिल से कीजिए। मन लगाकर कीजिए। अपना बेस्ट दीजिए। आपकी मेहनत और आपका जुनून आगे का रास्ता खोलता है। पढ़िए बातचीत के प्रमुख अंश… 2011 के लठ्ठाखमहन प्रतियोगिता में बेस्ट खिलाड़ी के पुरस्कार से अर्जुन अवार्ड तक का सफर कैसे देखती हैं? -तब से अब तक का सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा। बिना मेहनत और संघर्ष के कुछ नहीं मिलता। अगर आप संघर्ष पर नियंत्रण कर लेते हैं तो हर लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं। इस संघर्ष के बीच यह सम्मान मिलना प्रोत्साहित करता है। मेरे इस सफर में टीम के साथ परिवार ने भी भरपूर साथ दिया। यह अर्जुन अवार्ड मुझे हमेशा प्रोत्साहित करेगा। मैं अपना बेस्ट दूंगी, ताकि और अवार्ड मिले। खिलाड़ियों को और क्या-क्या संसाधन मिले, जिससे वे उभरकर सामने आए? -सबसे जरूरी है अच्छा कोच, जो खेल की बारीकियां बताए। अच्छी कोचिंग से खिलाड़ी सही दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। खिलाड़ियों का भी खेल के प्रति समर्पण होना चाहिए। खिलाड़ियों के पास खेल सामग्री होनी चाहिए, जिससे वे बेहतर प्रैक्टिस कर सके। प्रैक्टिस के लिए बेहतर जगह भी होनी चाहिए। -शेष पेज 13 पर


