खैरथल-तिजारा में निर्माण कार्य पर रोक:पराली समेत प्रदूषण फैलाने वाले कामों पर प्रतिबंध, हर विभाग सौंपेगे रिपोर्ट

नेशनल कैपिटल रीजन यानि एनसीआर में बढे वायु प्रदूषण को देखते हुए 17 दिसंबर को ग्रैप-4 लागू किया गया। इसे लेकर खैरथल-तिजारा जिले में बुधवार को जिला कलेक्टर किशोर कुमार ने वीसी के जरिए जिले से सभी विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान कलेक्टर ने कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) द्वारा जारी दिशा निर्देश के अनुपालन को लेकर सभी संबंधित विभागों को जरूरी आदेश जारी किए। कलेक्टर ने कहा-वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सभी विभागों को सख्त कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने पराली जलाने पर रोक, वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण की निगरानी, सड़कों पर उड़ने वाली धूल के नियंत्रण हेतु नियमित सफाई और पानी के छिड़काव को अनिवार्य किया है। इसके अलावा, निर्माण कार्यों और औद्योगिक इकाइयों से उठने वाली धूल और प्रदूषण पर भी कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने रीको, बीड़ा, नगर परिषद, कृषि विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और यातायात विभाग के अधिकारियों को कार्रवाई करने का आदेश दिया। हर विभाग को सौंपी जिम्मेदारी GRAP के स्टेज ग्रेप-4 के रहेंगे ये नियम हर हफ्ते भेजनी होगी प्रगति रिपोर्ट
कलेक्टर ने अधिकारियों कहा-सभी विभाग अपनी प्रोग्रेस रिपोर्ट नियमित रूप से भिवाड़ी स्थित पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड कार्यालय में भेजें। इसमें उठाए गए कदमों और उनकी सफलता का विवरण शामिल होना चाहिए। ​​​​​​AQI क्या है और इसका हाई लेवल खतरा क्यों?
AQI एक तरह का थर्मामीटर है। बस ये तापमान की जगह प्रदूषण मापने का काम करता है। इस पैमाने के जरिए हवा में मौजूद CO (कार्बन डाई ऑक्साइड ), OZONE, (ओजोन) NO2 (नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड) , PM 2.5 (पार्टिकुलेट मैटर) और PM 10 पोल्यूटेंट्स की मात्रा चेक की जाती है और उसे शून्य से लेकर 500 तक रीडिंग में दर्शाया जाता है। हवा में पॉल्यूटेंट्स की मात्रा जितनी ज्यादा होगी, AQI का स्तर उतना ज्यादा होगा और जितना ज्यादा AQI, उतनी खतरनाक हवा। वैसे तो 200 से 300 के बीच AQI भी खराब माना जाता है, लेकिन अभी हालात ये हैं कि राजस्थान, हरियाणा दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ये 300 के ऊपर जा चुका है। ये बढ़ता AQI सिर्फ एक नंबर नहीं है। ये आने वाली बीमारियों के खतरे का संकेत भी है। लगातार प्रदूषण के संपर्क में रहने से सांस संबंधी बीमारियां,आंखों में जलन और एलर्जी के मामलों में वृद्धि होती है। ऐसे में जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड स्थिति पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं। इसके अलावा, क्षेत्र में प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त उपाय किए जा रहे हैं। इसके अलावा प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें और अनावश्यक गतिविधियों से बचें। इसके अलावा, प्रदूषण को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीड़ा अतुल प्रकाश, रिको यूनिट के वरिष्ठ क्षेत्र प्रबंधक ज्ञानेंद्र शर्मा और आदित्य शर्मा, नगर परिषद आयुक्त रामकिशोर मेहता, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अमित शर्मा और जीएमडीआईसी सुरजीत सिंह खोरिया सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे। यह भी पढ़ें प्रदूषण के कारण खैरथल-तिजारा के स्कूलों में छुट्‌टी:भिवाड़ी में सांस लेना हुआ मुश्किल, उद्योगों और कचरा जलाने पर कड़ी निगरानी

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