छत्तीसगढ़ के कटंगी गांव में शीतलाल निर्मलकर के कथित सामाजिक बहिष्कार विवाद के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। हाल ही में पीड़ित द्वारा खुद को नुकसान पहुंचाने के प्रयास के बाद, अधिकारियों ने गांव में शांति बैठक बुलाई और सामाजिक बहिष्कार को गैरकानूनी बताते हुए सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब शीतलाल निर्मलकर ने आरोप लगाया कि गांव के कुछ लोगों ने उन्हें और उनके परिवार को सामाजिक रूप से अलग-थलग कर दिया है। उन्होंने बताया कि वे लंबे समय से न्याय के लिए पुलिस थानों और प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। इसी मानसिक दबाव के चलते, शीतलाल ने खैरागढ़ कलेक्टरेट परिसर में खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी। इस घटना ने मामले को और गंभीर बना दिया, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया। बैठक में सरपंच सहित गांव के लोग हुए शामिल स्थिति को संभालने के लिए, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) की मौजूदगी में ग्राम पंचायत भवन में एक विशेष बैठक आयोजित की गई। इसमें सरपंच, पंचगण, निर्मलकर समाज के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। सामाजिक बहिष्कार करना कानूनन अपराध बैठक में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति या परिवार का सामाजिक बहिष्कार करना कानूनन अपराध है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे कृत्यों में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, ग्रामीणों से अपील की गई कि वे आपसी विवादों को बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के जरिए सुलझाएं। सरपंच और समाज के प्रतिनिधियों ने प्रशासन को भरोसा दिलाया कि भविष्य में गांव में ऐसी स्थिति नहीं बनने दी जाएगी। ग्रामीणों ने भी आपसी भाईचारा और शांति बनाए रखने का संकल्प लिया। प्रशासन ने कहा कि गांव में कानून-व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जाएगी और किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।


