बालोद जिले के सबसे बड़े धार्मिक स्थल मां गंगा मैय्या मंदिर, झलमला में इस नवरात्रि के अवसर पर 900 मनोकामना ज्योति कलश स्थापित किए जाएंगे। इनमें से 50 ज्योति कलश घी के होंगे, जिन्हें मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा, जबकि शेष ज्योति कलश मंदिर के भवन में रखे जाएंगे। मंदिर ट्रस्ट के सदस्य पालक ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि, ज्योति कलश स्थापना की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। रविवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ माता की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी, जिसके बाद विधिवत रूप से दोपहर 12 बजे ज्योत प्रज्ज्वलित की जाएगी। चैत नवरात्रि पर लगता है भव्य मेला हर साल चैत्र नवरात्रि के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां गंगा मैय्या के दर्शन करने झलमला पहुंचते हैं। इस दौरान झलमला में भव्य मेला लगता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस बार भी नवरात्रि के दौरान भक्तों की भारी भीड़ जुटने की संभावना है। मंदिर ट्रस्ट ने दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं। भक्तों की मनोकामना होती है पूरी – धीरज चोपड़ा बालोद निवासी धीरज चोपड़ा ने बताया कि, वह बचपन से इस मंदिर में आ रहे हैं और मानते हैं कि जो भक्त यहां मनोकामना दीप जलाते हैं, उनकी हर इच्छा पूरी होती है। उनके पूर्वजों के अनुसार, मां गंगा मैया का इतिहास 100 साल से भी अधिक पुराना है। तालाब से निकली थी गंगा मैय्या की मूर्ति धीरज ने बताया कि, माता की चमत्कारिक मूर्ति तालाब से प्रकट हुई थी, लेकिन केवट इसे साधारण समझकर बार-बार तालाब में फेंक देता था। बाद में एक पुजारी को स्वप्न में संकेत मिला, जिसके बाद इस मूर्ति को एक वृक्ष के नीचे स्थापित कर दिया गया। आज मां गंगा मैया की यह पावन प्रतिमा छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है।


