सिटी रिपोर्टर | भिलाई बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को ध्यान में रखते हुए श्री गजानन महाराज मंदिर, हुडको में 28 फरवरी को पुष्य नक्षत्र के शुभ अवसर पर स्वर्ण प्राशन चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जाएगा। यह शिविर शाम 4 बजे से 6 बजे तक आयोजित होगा। आयोजन डॉ. लवेश कुमार कुंभारे और डॉ. शुभांकर चटर्जी के मार्गदर्शन में संपन्न होगा, जिसमें जन्म से लेकर 16 वर्ष तक के बच्चों को स्वर्णप्राशन संस्कार कराया जाएगा। आयुर्वेद में वर्णित स्वर्णप्राशन एक प्राचीन संस्कार है, जिसमें स्वर्ण भस्म, मधु, घृत तथा ब्राह्मी, मुलेठी, वच और गिलोय जैसी बुद्धि एवं स्मरण शक्ति बढ़ाने वाली औषधियों का मिश्रण बच्चों को चटाया जाता है। यह प्रक्रिया प्रतिमाह पुष्य नक्षत्र के दिन की जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के मस्तिष्क का लगभग 90 प्रतिशत विकास पांच वर्ष की आयु तक हो जाता है, इसलिए प्रारंभिक अवस्था में दिया गया स्वर्णप्राशन उनके सर्वांगीण विकास में सहायक माना जाता है। आयुर्वेद में इसे प्राकृतिक रूप से रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली प्रक्रिया के रूप में भी देखा जाता है। शिविर के संबंध में दी गई जानकारी के अनुसार स्वर्णप्राशन से बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, पाचन क्रिया में सुधार होता है तथा बुद्धि और स्मरण शक्ति का विकास होता है। इससे बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनते हैं। अति सक्रिय बच्चों में भी इसके सकारात्मक परिणाम बताए गए हैं। इसके अतिरिक्त रात में बिस्तर गीला करने की आदत, एलर्जी, सर्दी, खांसी और दमा जैसी समस्याओं में भी लाभ मिलने की बात कही गई है। हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करने तथा पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने में भी इसे सहायक बताया गया है।


