गरुड़ प्रतिमा-स्तंभ पर ध्वजारोहण से शुरू होगा ब्रह्मोत्सव:मृदाहरण की रस्म निभाई जाएगी, झालरिया मठ में 23 से होंगे कई धार्मिक कार्यक्रम

डीडवाना में स्थित प्राचीन झालरिया मठ में भगवान जानकीवल्लभजी महाराज का ब्रह्मोत्सव 23 फरवरी से 1 मार्च 2026 तक मनाया जाएगा। यह उत्सव फाल्गुन शुक्ल 6 से फाल्गुन शुक्ल 13, संवत 2082 तक चलेगा। मठाधीश्वर श्रीघनश्यानाचर्य महाराज के सान्निध्य में यह उत्सव संपन्न होगा। इस दौरान प्रतिदिन सुबह और शाम भगवान की सवारियां निकाली जाएंगी। इन सवारियों में श्रीहरि संकीर्तन, स्तोत्र पाठ, गोष्ठी-प्रसाद और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा। मृदाहरण की रस्म निभाई जाएगी
उत्सव के दौरान प्रतिदिन 23 फरवरी से प्रातःकाल श्री गरुड़ प्रतिमा और गरुड़ स्तंभ पर ध्वजारोहण किया जाएगा। इसके दर्शन का विशेष महत्व बताया गया है। मंदिर में नित्य यज्ञ, वेदपारायण और दोपहर में तिरुमंजन (अभिषेक) जैसे अनुष्ठान भी होंगे।
उत्सव के प्रमुख आकर्षणों में विभिन्न वाहन सवारियां शामिल हैं। 23 फरवरी (सोमवार) को हनुमान वाहन और मंगलगिरी कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें बगीचे में मृदाहरण की रस्म निभाई जाएगी। भगवान सूर्यप्रभा और शेषवाहन की निकलेगी सवारी
24 फरवरी को भगवान सूर्यप्रभा और शेषवाहन पर विराजित होकर सवारी निकाली जाएगी। 25 फरवरी (बुधवार) को गरुड़ वाहन पर भगवान का नगर भ्रमण होगा।
26 फरवरी (गुरुवार) को फाग उत्सव विशेष रूप से मनाया जाएगा। दोपहर 2 बजे भगवान मंगलगिरी में विराजकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। यह सवारी बांगड़ चौक, सुनारों की गली, गुदड़ी बाजार, नागौरी गेट, दीनदयाल सर्किल, कृष्ण भवन, राजपूत कॉलोनी और सीताराम बाग जैसे प्रमुख मार्गों से गुजरेगी। इस दिन अबीर-गुलाल के साथ फाग उत्सव, जल विहार और परकाल लीला का आयोजन होगा। मोहनी स्वरूप की सवारी निकाली जाएगी
27 फरवरी (शुक्रवार) को प्रातः 10 बजे से मोहनी स्वरूप की सवारी निकाली जाएगी। 28 फरवरी (शनिवार) को भगवान पालकी चांदी, अश्व वाहन (परकाल लीला) और गज वाहन पर विराजेंगे। शाम को फाग उत्सव में स्थानीय कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे और स्वामीजी महाराज का मंगलाशासन होगा। कल्पवृक्ष और पुष्पक विमान की सवारी 1 मार्च को
उत्सव के अंतिम दिन 1 मार्च को कल्पवृक्ष और पुष्पक विमान की सवारी निकाली जाएगी।
इस ब्रह्मोत्सव के दौरान शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरने वाली सवारियों में विभिन्न स्थानों पर गोष्ठी प्रसाद और भजन-कीर्तन का आयोजन होगा। डीडवाना में यह ब्रह्मोत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामूहिक उत्साह का केंद्र बनेगा।

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