गर्मी सिर पर, प्लास्टिक की झोपड़ी में 19 परिवार जीवन गुजार रहे

लव कुमार दूबे | गढ़वा जिले के मेराल प्रखंड के बहेरवा गांव के परहिया परिवार के 85 लोग हाथियों के आंतक से गांव छोड़ कर गेरुआसोती गांव स्थित सड़क किनारे पहाड़ी के नीचे प्लास्टिक व फूंस की झोपड़ी में पिछले एक वर्ष से जीवन गुजारने को विवश हैं। स्थिति यह कि गर्मी के मौसम परहिया परिवारों को पुन: झेलनी पड़ेगी। अभी तक जिला प्रशासन की ओर से आवास निर्माण की शुरूआत तक नहीं की जा सकी है। जबकि उपायुक्त दिनेश कुमार यादव ने जनवरी महीने में ही आवास निर्माण शुरू कराने का निर्देश दिया था। विदित हो कि हाथियों के बढ़ते आतंक ने परहिया समुदाय के 19 परिवारों के 85 लोग पिछले एक वर्ष से अपना पुस्तैनी घर-बार छोड़ने पर मजबूर कर दिया है। पांच-सात परिवार एक वर्ष से गांव छोड़ चुके हैं। वहीं अक्टूबर 2025 में रमेश परहिया को हाथियों ने पटक-पटक कर मार डाला था। तब से सभी परहिया परिवार वहां से भाग गए। बहेरवा गांव से जान बचाकर करीब चार किलोमीटर दूर गेरुआ सोती गांव के पोटाम पहाड़ी के नीचे शरण लिए हुए ये परिवार आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। हाथियों के डर से गांव छोड़कर आए लगभग 85 लोग, जिनमें बच्चे, महिलाएं और वृद्ध शामिल हैं, प्लास्टिक और वन तुलसी की अस्थायी झोपड़ियों में किसी तरह जीवन गुजार रहे हैं। बहेरवा गांव में हाथियों का झुंड अक्सर आठ से लेकर 30 की संख्या में पहुंच जाता है। हाथियों ने कई कच्चे मकानों को ध्वस्त कर दिया है। मवेशियों की जान बचाने के लिए ग्रामीणों को उन्हें खुला छोड़ना पड़ा। भय के कारण ग्रामीण रात में गांव लौटने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। प्रभावित परिवारों में जगदीश परहिया, राजेंद्र परहिया, सुनील परहिया, विनोद परहिया, पप्पू परहिया, फजीहत परहिया, नारायण परहिया, शिव रत्न परहिया, नंदू परहिया, प्रेम परहिया, धनंजय परहिया, प्रमोद परहिया, बिरझू परहिया, अखिलेश परहिया, टुन्नु परहिया, सुरेश परहिया, उमेश परहिया, दिनेश परहिया और रमेश परहिया शामिल हैं। अभी आवास निर्माण शुरू नहीं : ग्रामीण प्रभावित लोगों ने कहा कि अपना पुस्तैनी घर, करीब 17 एकड़ जमीन और मवेशी सब कुछ छोड़कर भागे हैं। हाथियों का आतंक इतना बढ़ गया है कि बच्चों और महिलाओं की जान हर समय खतरे में रहती है। मजबूरी में परिवार के साथ जंगल किनारे झोपड़ी बनाकर रहना पड़ रहा है। शरण स्थल पर न तो पक्के आवास की व्यवस्था है और न ही स्वास्थ्य या शिक्षा की कोई सुविधा। कड़ाके की ठंड, भीषण गर्मी और बरसात के मौसम में भी हमलोगों को प्लास्टिक के झोपड़ी में रहना पड़ रहा है। प्रशासन अभी तक आवास निर्माण की शुरूआत तक नहीं किया है। मेराल के अंचलाधिकारी सह बीडीओ यशवंत नायक ने बताया कि पीड़ित उक्त सभी लोगों को आवास उपलब्ध कराने के लिए जमीन की मापी कराकर चिन्हित कर दिया गया है। नगर पंचायत चुनाव में ड्यूटी लग जाने के कारण आवास निर्माण के लिए प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सका है। लेकिन जल्द ही आवास निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

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