संसद परिसर में गुरुवार को NDA और इंडिया गठबंधन के सांसदों के आमने-सामने होने व धक्का-मुक्की में चोट लगने की घटना हुई। इसे लेकर पूर्व CM अशोक गहलोत ने लोकसभा स्पीकर पर सवाल उठाए हैं। गहलोत ने कहा- संसद परिसर में आज जो कुछ हुआ, स्पीकर साहब इसकी निष्पक्ष जांच कराएं। जो कमी-खामी रही है, उस पर एक्शन करें। लेकिन, वे किसके खिलाफ एक्शन करेंगे? वे बीजेपी सांसदों के खिलाफ तो एक्शन करेंगे नहीं। उनकी अपनी मजबूरियां हैं, दबाव है। गहलोत ने कहा- लोकसभा स्पीकर ओम बिरला निष्पक्ष होकर काम करें तो यह नौबत ही नहीं आए। अब उन्होंने (स्पीकर ने) तो संसद शुरू होते ही तो इमरजेंसी पर खुद प्रस्ताव रख दिया। खुद नहीं, सत्ता पक्ष प्रस्ताव रखता है। स्पीकर अलाउ करता है। वह अलग बात थी। खुद ही प्रस्ताव रख रहे हैं और वोटिंग करवा रहे हैं। उस स्पीकर से हम क्या उम्मीद कर सकते हैं? मैं तो समझता हूं घटना की नैतिक जिम्मेदारी भी स्पीकर को लेनी चाहिए। गहलोत ने कहा- राज्यों में और पार्लियामेंट का स्पीकर या सभापति जब कोई बन जाता है तो वह किसी पार्टी का नहीं रहता। स्पीकर बनने के बाद अपनी पार्टी से इस्तीफा दे देते हैं। यह परंपरा रही है। लेकिन, यह परंपरा टूटती जा रही है। इसी कारण इस तरह की घटनाएं होती हैं। सांसद आमने-सामने हुए तब सुरक्षाकर्मी गायब क्यों थे?
गहलोत ने कहा- संसद में जब प्रदर्शन वगैरह होते हैं तो सुरक्षाकर्मी एक घेरा बना लेते हैं। आज जब NDA और इंडिया गठबंधन के सांसद आमने-सामने हुए तो उस वक्त सुरक्षाकर्मी गायब क्यों थे? संसद में घटना घटी है। संसद का प्रशासनिक अधिकारी लोकसभा का स्पीकर होता है। उसके रहते हुए यह घटना कैसे घटित हो गई? यह बहुत दुखद बात है। यह समझ से परे है कि सिक्योरिटी वाले वहां मौजूद क्यों नहीं रहे? जो मैं सुन रहा हूं, समझ रहा हूं, मुझे बहुत दुख होता है। यह घटना ऐसी घटी है कि कभी कल्पना नहीं की जा सकती। खड़गे के साथ मिसबिहेव किया गया
गहलोत ने कहा- लोकतंत्र में विचारधारा की लड़ाई होती है। राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष हैं। खड़गे साहब हमारे अध्यक्ष हैं। देश के बड़े दलित नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। उनकी 80 से ऊपर की उम्र है। उस व्यक्ति के साथ जिस प्रकार व्यवहार किया गया, उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। उनको सड़क पर बैठना पड़ा, उनके लिए कुर्सी लाई गई। मुश्किल से उस पर बैठाया गया। यह घोर निंदनीय घटना है।


