गहलोत-राज में खुले अंग्रेजी मीडियम स्कूल बंद करने की तैयारी:डिप्टी सीएम बैरवा की अध्यक्षता में बनी मंत्रियों की कमेटी;3 हजार स्कूलों का होगा रिव्यू

गहलोत राज में बने नए जिलों और संभाग के बाद सरकार अंग्रेजी मीडियम स्कूलों के रिव्यू की तैयारी कर रही है। गहलोत राज में खुले तीन हजार इंग्लिश मीडिया स्कूल या तो बंद हो सकते है या फिर उन्हें मर्ज किया जाएगा। इससे पहले इन सभी कर रिव्यू होगा। इस ​रिव्यू के बाद ही प्रदेश की अंग्रेजी मीडियम स्कूलों को बंद करने या इन्हें जारी रखने पर फैसला किया जाएगा। सरकार ने कांग्रेस राज के दौरान खुले हुए अंग्रेजी स्कूलों का रिव्यू करने के लिए डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा की अध्यक्षता में एक कैबिनेट सब कमेटी बनाई है। कैबिनेट सब कमेटी में स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और खाद्य मंत्री सुमित गोदारा को मेंबर बनाया गया है। कमेटी को अंग्रेजी स्कूलों का रिव्यू करके रिपोर्ट देनी है कैबिनेट सब कमेटी को जिलेवार अंग्रेजी स्कूलों का रिव्यू करके सरकार को रिपोर्ट देनी है। जिन स्कूलों में पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्टाफ नहीं है और जहां बच्चे कम है उन स्कूलों को बंद करने पर भी फैसला हो सकता है। भाजपा नेताओं ने विपक्ष में रहने के दौरान कई जगह खुले अंग्रेजी स्कूलों पर आपत्ति जताते हुए सरकार बनने पर उनके रिव्यू का ऐलान किया था। अंग्रेजी मीडियम स्कूलों में कई जगह स्टाफ और पर्याप्त इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं कांग्रेस राज्य के दौरान खोले गए अंग्रेजी स्कूलों को लेकर कई जगह से आपत्ति आई थी। कई जगहों पर हिंदी मीडियम स्कूलों को अंग्रेजी मीडियम में बदल गया था ।वहां पर पर्याप्त स्टाफ नहीं होने की वजह से बच्चों को अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाई करने में अब भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं अंग्रेजी मीडियम स्कूलों के रिव्यू के बाद इन पर फैसला करने के तीन विकल्प हैं । जिन स्कूलों में बच्चों की संख्या कम है और पर्याप्त स्टाफ और इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है उन स्कूलों को बंद करने पर भी फैसला हो सकता है। दूसरा विकल्प उन अंग्रेजी स्कूलों को हिंदी मीडियम में बदलने का है और तीसरा विकल्प मर्ज करने का है। अंग्रेजी स्कूलों पर पहले भी खूब सियासी विवाद हो चुका कांग्रेस सरकार के पांच साल के दौरान खोले गए महात्मा गांधी अंग्रेजी स्कूलों पर खूब सियासी विवाद होता रहा है। बीजेपी ने इन स्कूलों पर पहले भी सवाल उठाए थे। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सरकार बनते ही अंग्रेजी स्कूलों को बंद करने के संकेत दिए थे, लेकिन बाद में मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। विधानसभा के बजट सत्र से पहले रिव्यू के फैसले पर विवाद तय, कांग्रेस को मिला मुद्दा ? सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र से ठीक पहले अंग्रेजी स्कूलों का रिव्यू करने कमेटी बनाकर एक बार फिर नए सिरे से विवाद की शुरुआत कर दी है। कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार को घेरेगी। विधानसभा सत्र इस बार हंगामेदार रहेगा। कांग्रेस पहले भी बीजेपी सरकार को अंग्रेजी स्कूल बंद करने के शिक्षा मंत्री के पुराने बयानों और फिर यूटर्न को लेकर घेरती रही है। अंग्रेजी स्कूलों के लिए शिक्षकों का अलग कैडर नहीं बना गहलोत सरकार ने अंग्रेजी स्कूलों के लिए 10 हजार शिक्षक भर्ती करने और अंग्रेजी स्कूलों के शिक्षकों का अलग से कैडर बनाने की घोषणा की थी। गहलोत सरकार की घोषणा पूरी नहीं हुई और बाद में सरकार बदल जाने से प्रक्रिया अटक गई। सरकार बदलने के बाद अंग्रेजी स्कूलों के शिक्षकों का अलग कैडर बनाने के काम पर ब्रेक लग गया।

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