राजस्थान विश्वविद्यालय में बुधवार को आयोजित एक विशिष्ट व्याख्यान में दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जे.एन. सिन्हा ने महात्मा गांधी के पर्यावरणीय दृष्टिकोण पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। इतिहास एवं भारतीय संस्कृति विभाग और सामाजिक विज्ञान अनुसंधान केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. सिन्हा ने वर्तमान पर्यावरण संकट में गांधीजी के विचारों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गांधीजी ने जैन धर्म से प्रभावित होकर भारतीय समाज की मूल अवधारणाओं से अपने सिद्धांतों का निर्माण किया। गांधीजी के पर्यावरण संबंधी प्रयोगों में खान-पान के जीवन पद्धति पर प्रभाव, आयुर्वेदिक चिकित्सा और देसी नुस्खों का विशेष महत्व था। चंपारण सत्याग्रह के दौरान उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में फैली बीमारियों का सर्वेक्षण कर कुओं की सफाई का अभियान चलाया, जो उनकी पर्यावरण के प्रति चिंता को दर्शाता है। डॉ. सिन्हा ने महात्मा गांधी के कृषि विज्ञान, प्रकृति और पारिस्थितिकी संबंधी विचारों को शोधार्थियों के लिए एक नए अध्ययन क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. निक्की चतुर्वेदी ने की, जबकि डॉ. कुलवंत सिंह शेखावत ने समन्वयक की भूमिका निभाई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कई आचार्य और शोधार्थी मौजूद रहे।


