तीन दिवसीय MPASICON-2026 के समापन सत्र में सर्जरी की आधुनिक तकनीकों को गांव और छोटे शहरों तक पहुंचाने पर चर्चा हुई। स्टेट एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इंडिया के चेयरपर्सन डॉ. राकेश शिवहरे ने कहा कि प्रदेश के हर जिले के मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पतालों में लेप्रोस्कोपी की नियमित ट्रेनिंग शुरू करने का प्रयास किया जाएगा। यह सम्मेलन एसोसिएशन के मध्य प्रदेश स्टेट चैप्टर और इंदौर सिटी चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। अंतिम दिन 25 शैक्षणिक सत्र आयोजित कॉन्फ्रेंस के अंतिम दिन 25 शैक्षणिक सत्र हुए। इसके साथ एक क्विज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। यूके से आई सर्जन डॉ. दीपिका अकोलेकर ने बताया कि दुनिया भर में हर साल करीब 10 लाख नए ब्रेस्ट कैंसर के मामले सामने आते हैं। भारत में हर साल 20 हजार से अधिक केस दर्ज होते हैं। मेमोग्राफी से शुरुआती पहचान संभव डॉ. अकोलेकर ने कहा कि मेमोग्राफी से शुरुआती स्तर पर कैंसर की पहचान संभव है। उन्होंने टारगेटेड सर्जरी को प्रभावी विकल्प बताया। MPASICON के पूर्व चेयरपर्सन डॉ. महिम कौशारिया ने बताया कि सम्मेलन में लाइव सर्जरी और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग सेशन आयोजित किए गए। इसमें 200 से अधिक रिसर्च पेपर और पोस्टर प्रस्तुत हुए। एआई और रोबोटिक्स से सर्जरी अधिक सटीक सीनियर सर्जन डॉ. सीपी कोठारी ने कहा कि रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सर्जरी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। इनसे सर्जरी की सटीकता बढ़ी है। डॉ. कोठारी ने बताया कि अधिक लागत और बीमा कवरेज न होने से रोबोटिक सर्जरी की पहुंच फिलहाल सीमित है। लेप्रोस्कोपी से मरीज जल्दी डिस्चार्ज MPASICON के सेक्रेटरी डॉ. अक्षय शर्मा ने बताया कि सम्मेलन के पहले दिन की गई 14 सर्जरी में से 8 मरीज डिस्चार्ज हो चुके हैं। शेष मरीजों को भी दो दिन में छुट्टी दी जाएगी। कॉन्फ्रेंस में जटिल मामलों में लेप्रोस्कोपी और रोबोटिक सर्जरी के डेमो प्रेजेंटेशन भी किए गए।


