भ्रष्टाचार करने और सरकारी योजनाओं को पलीता लगाने में अफसर किसी भी स्तर पर ठेकेदारों से गठजोड़ करने में पीछे नहीं हैं। प्रदेश में बनी प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनी सड़कों के मामले में भी कई स्तर पर अफसरों की ऐसी गड़बड़ियां कैग रिपोर्ट में पकड़ में आई हैं। कैग टीम ने प्रदेश में ग्वालियर समेत 10 जिलों में बनाई गईं सड़कों के निर्माण प्रक्रिया और गुणवत्ता को लेकर पड़ताल की। इसमें खुलासा हुआ कि सड़कों की प्लानिंग से लेकर निर्माण तक मप्र ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के अफसरों ने गंभीरता नहीं दिखाई। नियमों को दरकिनार कर ठेकेदार और डीपीआर तैयार करने वाली कंसल्टेंट कंपनियों का साथ दिया। इन गड़बड़ियों को पकड़ने के बाद कैग ने सरकार से सिफारिश की है कि इस मामले में प्राधिकरण के महाप्रबंधकों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। रोड बनाई, मिट्टी टेस्ट नहीं रोड निर्माण के लिए प्रस्तावित स्थल की मिट्टी का टेस्ट कराना जरुरी है। नियमानुसार प्रत्येक एक किमी में 2 सैंपल टेस्ट कराने होते हैं। ग्वालियर में 8 पैकेज में 124.71 किमी की रोड को स्वीकृत किया। इनमें 249 सैंपल टेस्ट मिट्टी के होने थे, लेकिन सिर्फ 110 ही टेस्ट कराए। 139 टेस्ट कराए बिना ही रोड बना दी। कैग रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि रोड निर्माण की नींव मिट्टी होती है। ये अफसरों की बड़ी गलती है। बिना भूमि रोड की प्लानिंग सरकार ने पैकेज नंबर 14602 में ग्वालियर के लिए 4.30 किमी की सड़क 19 जनवरी 2018 को स्वीकृत की। जिसका निर्माण 2019 तक होना था। लेकिन इसे बिना बनाए 2020 में बंद कर दिया। कारण, जिस जमीन पर ये रोड प्लान की गई वह निजी थी। भूमि का प्रकरण कोर्ट में था। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि अफसरों की इस कारगुजारी से डीपीआर में खर्च राशि का नुकसान शासन को उठाना पड़ा। कैग की सिफारिश: महाप्रबंधकों के खिलाफ हो कार्रवाई मप्र शासन को मप्र ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के महाप्रबंधकों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। महाप्रबंधकों ने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) को काफी देरी व कई कमियों के साथ स्वीकार किया है। डीपीआर की मूल्यांकन प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए शासन को उपयुक्त उपाय करने चाहिए। प्राधिकरण के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए, जिन्होंने सड़कों के उन्नयन की योजना बनाते समय जनपद पंचायतों से अनुमोदन और निर्वाचित प्रतिनिधियों से सहमति या सुझाव नहीं लिए।


