मुकेश कुमार सिंह जिले में फाइलेरिया रोग का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 37 ऐसे गांवों को चिन्हित किया है। जहां फाइलेरिया के मरीजों की संख्या अधिक पाई गई है। इन गांवों में 1 अप्रैल 2026 से विशेष रात्रि शिविर अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत स्वास्थ्य कर्मी रात के समय गांवों में पहुंचकर जांच, दवा वितरण और जागरूकता कार्यक्रम चलाएंगे। जामताड़ा जिला फाइलेरिया से ग्रसित जिलों में राज्य स्तर पर तीसरे स्थान पर है। जबकि जनसंख्या के अनुपात में यह राज्य में पहले स्थान पर पहुंच गया है। वर्ष 2026 में अब तक 50 नए मरीजों की पहचान की गई है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। वर्तमान में जिले में कुल 3300 फाइलेरिया मरीज दर्ज हैं। सबसे अधिक प्रभावित प्रखंडों में नाला, कुंडहित और नारायणपुर शामिल हैं। इन क्षेत्रों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग ने स्थानीय प्रशासन के सहयोग से विशेष रणनीति तैयार की है ताकि समय रहते रोग पर नियंत्रण पाया जा सके। शहरडाल पंचायत के गादी शहरडाल गांव में फाइलेरिया रोग का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। लगभग 400 की आबादी वाले इस गांव में 100 से अधिक लोग फाइलेरिया से पीड़ित हैं। कई बार स्वास्थ्य शिविर लगाए जाने के बावजूद बीमारी कम होने के बजाय नए मरीज सामने आ रहे हैं। गांव में करीब 60 से अधिक घर हैं। जहां सभी जाति के लोग निवास करते हैं। पेयजल व्यवस्था की बात करें तो यहां 12 चापाकल हैं। जिनमें से केवल पांच ही चालू अवस्था में हैं। इसके अलावा गांव में दो जल मीनार भी हैं। जिनका पानी लगभग 60 घरों में उपयोग किया जाता है। यदि जल मीनार खराब हो जाए तो ग्रामीणों को पांच चापाकलों पर निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि चापाकल का पानी पीने योग्य नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी की नियमित जांच नहीं होने के कारण फाइलेरिया रोग फैल रहा है। उनका कहना है कि लगभग 400 लोग इसी पानी का उपयोग करते हैं। जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। बताया जाता है कि फाइलेरिया रोगी का इलाज समय पर नहीं किया गया तो तीसरा, चौथा स्टेज के बाद मरीज को दिव्यांग घोषित किया जाता है। विशेषज्ञ डॉ निलेश कुमार ने बताया की मच्छरों की अधिकता जहां गंदा पानी जमा रहता है, नालियों की सफाई नहीं होती या तालाब-गड्ढों में पानी ठहरा रहता है, वहां क्यूलेक्स मच्छर तेजी से पनपते हैं। गांव में साफ-सफाई की स्थिति चिंताजनक गांव में साफ-सफाई की स्थिति भी चिंताजनक है। शौचालय की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण कई लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं। जिससे संक्रमण फैलने की आशंका और बढ़ जाती है। वहीं गांव के मुखिया सुखेंद्र टुडू का कहना है कि गादी शहरडाल गांव में फाइलेरिया के अधिक मामले सामने आना गंभीर चिंता का विषय है। उनका मानना है कि पानी की जांच नहीं होना इस समस्या का एक बड़ा कारण हो सकता है। उन्होंने संबंधित विभाग से जल की जांच और उचित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है। प्रभावित गांवों में चलेगा दवा वितरण अभियान सिविल सर्जन डॉ. निलेश कुमार ने बताया कि जिन गांवों में फाइलेरिया के मरीज अधिक हैं। वहां सभी लोगों को सामूहिक रूप से दवा खिलाई जाएगी। जो सदस्य बाहर गए हैं। उनके लौटने पर मॉनिटरिंग के साथ दवा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि दवा सेवन से शरीर में मौजूद फाइलेरिया के जीवाणु नष्ट होंगे और स्वस्थ लोग भी संक्रमण से सुरक्षित रहेंगे।


