जिले के गांव साबुआना में बाढ़ पीड़ितों के लिए भेजी गई सरकारी राहत राशि खुद एक बड़े “भ्रष्टाचार” का शिकार हो गई है। गांव के जागरूक निवासियों ने स्थानीय पंचायत और सरकारी महकमों के अधिकारियों पर मिलीभगत कर मुआवजे की राशि में करीब 40 लाख रुपये की हेराफेरी करने का दावा किया है। ग्रामीणों ने डिप्टी कमिश्नर फाजिल्का को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि गांव में मकानों के नुकसान का जो सर्वे किया गया, वह गलत है। ग्रामीण बृजलाल, विनोद कुमार, रामचंद्र, विनोद कुमार, रामेश्वर, सरवन कुमार, मदन लाल, धर्म चंद, सुल्तान राम ने इस पूरे खेल की परतें खोलते हुए बताया कि क्षेत्र में आई बाढ़ के बाद पंजाब सरकार ने साबुआना गांव के लिए 1 करोड़ 5 लाख 44 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की थी। आरोप है कि मुआवजे की इस बंदरबांट में उन रसूखदार लोगों को लाभ पहुंचाया गया जिनके घरों को बाढ़ से रत्ती भर भी नुकसान नहीं हुआ था। पत्र में खुलासा किया गया है कि कई अपात्र लोगों के खातों में 1,20,000 रुपये और 40,000 रुपये जैसी मोटी रकम डाल दी गई है। गांव में करीब 60 से 70 ऐसे मामले सामने आए हैं जहां बिना किसी क्षति के ही मुआवजा बांट दिया गया। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि जिन 24 घरों को “पूर्ण क्षतिग्रस्त” (टोटल डैमेज) दिखाकर 1 लाख 20 हजार रुपये प्रति घर का भुगतान किया गया, उनमें से 10 घर आज भी पूरी तरह सही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कागजों में इन पक्के घरों को गिरा हुआ दिखाकर सरकारी धन हड़प लिया गया। ग्रामीणों ने पंचायती राज विभाग के एक्सईएन ग्रोवर और पी.डब्ल्यूडी अधिकारी को इस साजिश का मुख्य सूत्रधार बताया है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने फील्ड में जाकर सर्वे करने की ज़हमत तक नहीं उठाई और पंचायत के सरपंच व कुछ खास रसूखदार व्यक्तियों के साथ बंद कमरों में बैठकर अपात्र लोगों की सूचियां तैयार कर लीं। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच ने अफसरों को अपने घर बुलाकर सूचियां तैयार करवाई और यह सब अफसरों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया है। इस धांधली का सबसे दुखद पहलू यह है कि वास्तविक पीड़ित, जिनके घर वास्तव में बाढ़ की भेंट चढ़ गए थे और बिल्कुल गिर चुके हैं, उनके नाम लिस्ट में शामिल ही नहीं किए गए। वे गरीब आज भी तिरपालों के नीचे रहने को मजबूर हैं क्योंकि उनकी फाइलों को या तो दबा दिया गया या उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया। सरपंच संजू धामू ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंचायत पर लगे 40 लाख रुपये के गबन और चहेतों को लाभ पहुंचाने के दावे पूरी तरह गलत हैं। सरपंच का कहना है कि बाढ़ के नुकसान का सर्वे पंचायती राज विभाग के एक्स.ई.एन द्वारा किया गया था और यह प्रक्रिया कुल तीन बार दोहराई गई थी। उनके अनुसार, सर्वे करने वाली टीम में शामिल जे.ई. और अन्य स्टाफ बाहर से आया था, जिसका पंचायत से कोई संबंध नहीं है। शिकायत की कॉपी दिखाते ग्रामीण।


