अक्टूबर में अमेरिका की पहल पर लागू हुए सीजफायर के बाद गाजा में हमास ने अंदरूनी मोर्चे पर अपनी पकड़ फिर मजबूत कर ली है। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा के लोगों का कहना है कि चार महीने में जहां-जहां हमास मौजूद है, उसने 90% से ज्यादा इलाकों में दोबारा कंट्रोल कर लिया है। गाजा के एक्टिविस्ट मोहम्मद दियाब ने कहा, ‘पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सड़कों पर लौट आई हैं। वे अपराध रोकने और जिन लोगों को सहयोगी या विरोधी मानते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं।’ इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का ‘बोर्ड ऑफ पीस’ गुरुवार को वॉशिंगटन में अपनी पहली बैठक करेगा। इसमें करीब 60 देशों को आमंत्रित किया गया है। बैठक में गाजा पट्टी के लिए ट्रम्प की शांति योजना पर रिपोर्ट पेश की जाएगी। हालांकि, टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, पीस बोर्ड के शुरुआती दस्तावेज में गाजा का ही स्पष्ट जिक्र नहीं है। ट्रम्प ने कहा कि बोर्ड का मिशन गाजा से कहीं आगे, पूरी दुनिया में शांति लाना है। कई यूरोपीय देशों ने इसे ट्रम्प का पर्सनल प्रोजेक्ट बताया और इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है। ट्रम्प के कंट्रोल में होगा पूरा पीस बोर्ड चार्टर के अनुसार, डोनाल्ड ट्रम्प को इनॉगुरल चेयरमैन (प्रथम अध्यक्ष) नामित किया गया है, और यह पद लाइफटाइम उनके द्वारा चुने गए उत्तराधिकारी तक रह सकता है। उनके पास वीटो पावर है। बोर्ड के अधिकांश फैसलों को चेयरमैन की मंजूरी चाहिए होती है, जिसका मतलब है कि ट्रम्प किसी भी निर्णय को रोक सकते हैं। बोर्ड के सदस्यों को जोड़ने, हटाने एजेंडा तय करने, सब्सिडियरी बॉडी बनाने, ग्रुप भंग करने पर ट्रम्प का पूरा कंट्रोल होगा। राष्ट्रपति पद खत्म होने के बाद भी वे चेयरमैन बने रह सकते हैं, क्योंकि यह पद उनकी राष्ट्रपति पद से स्वतंत्र है। केवल एग्जीक्यूटिव बोर्ड के सर्वसम्मति से उन्हें हटाया जा सकता है (जो व्यावहारिक रूप से लगभग असंभव है, क्योंकि एग्जीक्यूटिव बोर्ड भी ट्रम्प ही नियुक्त करेंगे)। विश्व नेताओं को बुला रहे ट्रम्प, पाकिस्तान भी शामिल ट्रम्प ने सोमवार को कहा था, ‘हम सभी विश्व नेताओं को बुला रहे हैं।’ हालांकि, अब तक यह साफ नहीं है कि कितने राष्ट्राध्यक्ष खुद शामिल होंगे। बैठक डोनाल्ड जे. ट्रम्प यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस में होगी। इस जगह का नाम हाल ही में बदला गया था। जर्मन न्यूज DW के मुताबिक करीब 60 देशों को बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा गया था, जिनमें से लगभग 27 देशों ने शामिल होने पर सहमति दी है। इनमें अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली और हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन जैसे नेता भी शामिल हैं। बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने निमंत्रण स्वीकार किया है, लेकिन वे खुद नहीं आ रहे, उनकी जगह विदेश मंत्री आएंगे। बोर्ड में शामिल आधे से ज्यादा देश, अमेरिका की उस सूची में हैं जिनके नागरिकों पर वीजा प्रतिबंध लगाने की तैयारी चल रही है। इनमें बेलारूस भी शामिल है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बैठक में शामिल होंगे। वहीं, मिडिल ईस्ट और यूरोप के कई देश केवल निचले स्तर के अधिकारियों को भेज रहे हैं या ऑब्जर्वर के रूप में भाग लेंगे। कई देशों ने शामिल होने से इनकार किया कई देशों ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया है, खासकर यूरोपीय देशों और कुछ सहयोगियों ने। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी आने से इनकार कर दिया है। उनकी जगह विदेश मंत्री गिदोन सार आएंगे। न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने स्पष्ट कहा कि बोर्ड का काम संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने बोर्ड में शामिल न होने का फैसला लिया, क्योंकि न्यूजीलैंड इसमें खास योगदान नहीं दे पाएगा । अधिकांश यूरोपीय देशों ने भी चिंता जताई है कि यह UN को कमजोर कर सकता है या ट्रम्प के व्यक्तिगत नियंत्रण वाला शरीर बन सकता है। कई G7 देशों ने भी दूरी बनाई है। शुरू में यह गाजा में युद्धविराम (2025 में हुए समझौते) को लागू करने, पुनर्निर्माण और स्थिरता के लिए था। UN सिक्योरिटी काउंसिल रेजोल्यूशन 2803 ने इसे स्वीकार किया था। ट्रम्प बोले- गाजा के लिए 5 बिलियन डॉलर देंगे सदस्य देश बोर्ड के चार्टर के मुताबिक, तीन साल की अस्थायी सदस्यता मुफ्त है। लेकिन स्थायी सीट के लिए पहले साल में 1 बिलियन डॉलर नकद देने की शर्त रखी गई है। यह साफ नहीं है कि किन देशों ने यह राशि दी है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि सदस्य देश गाजा में मानवीय राहत और पुनर्निर्माण के लिए 5 बिलियन डॉलर से ज्यादा देने का वादा करेंगे। साथ ही ‘इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स’ (ISF) और स्थानीय पुलिस के लिए हजारों जवान तैनात करने की प्रतिबद्धता भी जताई जाएगी। उन्होंने हमास से पूरी तरह से हथियार छोड़ने की मांग दोहराई है। गाजा में फोर्स के तैनाती की तैयारी में ट्रम्प गाजा में सुधार को लेकर ट्रम्प की 20 सूत्रीय योजना का पहला चरण सितंबर में घोषित हुआ था, जिसे तीन महीने पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने समर्थन दिया। पहले चरण में इजराइल-हमास के बीच आंशिक संघर्षविराम, मानवीय सहायता में बढ़ोतरी और बंधकों की रिहाई शामिल थी। दूसरे चरण में ISF की तैनाती और प्रशासनिक ढांचा खड़ा करना शामिल है। हालांकि, इन कदमों में देरी हो रही है। पिछले महीने एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा था कि ISF के गठन की घोषणा कुछ दिनों में हो सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। UN के प्रस्ताव के अनुसार, ISF को 2027 तक गाजा की सीमाओं की सुरक्षा, हथियारों को नष्ट करना, गैर-राज्य सशस्त्र समूहों के ढांचे को खत्म करने और नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी जाएगी। अब तक केवल इंडोनेशिया ने सार्वजनिक रूप से करीब 2,000 सैनिक भेजने की बात कही है। वे अप्रैल से पहले तैनात नहीं होंगे और गाजा के उस हिस्से में नहीं जाएंगे जो अभी भी इजराइली सेना के नियंत्रण में है। हमास बोला- जब तक इजराइली सेना यहां है, हथियार नहीं छोड़ेंगे दूसरी ओर हमास ने कहा है कि जब तक इजराइली सेना पूरी तरह नहीं हटती, वह हथियार नहीं डालेगा। हाल ही में हमास लीडर ओसामा हमदान ने अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में कहा कि संगठन ने अभी तक हथियारों पर कोई औपचारिक फैसला नहीं लिया है। वहीं, इजराइल का कहना है कि जब तक हमास पूरी तरह हथियार नहीं छोड़ता, सेना गाजा से नहीं हटेगी। इजराइल ने हमास को 60 दिन का समय दिया है कि वह पूरी तरह हथियार छोड़ दे। ट्रम्प के दामाद और वार्ताकार जेरेड कुशनर ने दावोस में गाजा के दक्षिणी हिस्से में छह नए शहर बसाने और समुद्री तट पर पर्यटन परियोजना बनाने की योजना पेश की थी। हालांकि, इसके लिए फंडिंग और समय-सीमा अभी तय नहीं है। इजराइल को ट्रम्प के पीस बोर्ड से नाराजगी इजराइल ट्रम्प के पीस बोर्ड को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुका है। नेतन्याहू के ऑफिस के मुताबिक, विदेश मंत्री गिदोन सार इस मुद्दे को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने उठाएंगे। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि बोर्ड का कौन सा हिस्सा इजराइल को आपत्तिजनक लग रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य समस्या तुर्किए विदेश मंत्री हाकान फिदान को शामिल करने से है। तुर्किए को हमास का समर्थक माना जाता है और इजराइल के साथ इसका संबंध तनावपूर्ण हैं। तुर्किए के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगन ने इजराइल की गाजा कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। इजराइल का कहना है कि ऐसे देशों को गाजा के प्रशासन में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इजराइली राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने नेतन्याहू के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि गाजा को ‘कार्यकारी बोर्ड’ की जरूरत नहीं, बल्कि हमास को पूरी तरह खत्म करने और बड़े पैमाने पर खुद से पलायन की जरूरत है। इजराइल का आरोप- हमास फिर से संगठित हो रहा इजराइल डिफेंस फोर्स (IDF) के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल नदाव शोशानी ने कहा, ‘हमास युद्धविराम को फिर से संगठित होने का समय मान रहा है। जब तक उसे निरस्त्र नहीं किया जाता, युद्ध खत्म नहीं माना जा सकता।’ IDF के मुताबिक युद्धविराम के बाद भी हमास की ओर से रोजाना हमले हो रहे हैं और अब तक चार इजराइली सैनिक मारे जा चुके हैं। दूसरी ओर, गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इजराइली हमलों में युद्धविराम के बाद 603 फलस्तीनी मारे गए हैं। हाल में IDF ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें मलबे के बीच दौड़ते कुछ लोगों को हथियारबंद आतंकी बताया गया था। अब गाजा जंग को जानिए…


