गादौली का पक्का बाग:भरतपुर राजवंश के सवाराम सिंह ने हसनपुर गादौली में बनाया था करीब 20 बीघा जमीन में पक्का बाग

नदबई क्षेत्र की ग्राम पंचायत गादौली का भरतपुर राजघराने से ताल्लकु है तो दूसरी ओर समीपवर्ती क्षेत्र में राजवंश की परम्परा के अनुरुप ही विगत दो सौ साल से आयोजित गणगौर मेला व कुश्ती दंगल होने के चलते समीपवर्ती क्षेत्र में अलग ही पहचान बनाए हुए हैं। भरतपुर राजवंश के शासक रहे बदनसिंह के वंशज सवाराम सिंह ने हसनपुर गादौली में करीब बीस बीघा जमीन पर पक्का बाग बनाया। कुम्हेर में रहते हुए सवाराम सिंह ने हसनपुर गादौली में पक्का बाग बनाया। पक्का बाग में लगी रेशम का रंगून तक व्यापार होता था। हसनपुर निवासी सेवा निवृत कर्मचारी भूपसिंह की मानें तो सवाराम सिंह की मौत के बाद उनके पुत्र नवल सिंह, गुलाब सिंह व कृष्णगोपाल गांव हसनपुर में रहने लगे। फिलहाल, पक्का बाग में खिन्नी के पेड़ दिखाई देते तो स्थानीय प्रशासन की ओर से 1984 में इंतकाल खोलते हुए राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय को जमीन सौप दी गई। शिक्षा विभाग को जमीन सौपने के बाद एग्रीकल्चर महाविद्यालय को लेकर प्रक्रिया की गई। इतना ही नही लुपिन संस्था की ओर से सात कमरों का निर्माण भी कराया गया। लेकिन, बाद में एग्रीकल्चर महाविद्यालय की प्रक्रिया फाइलों में बंद हो गई। गांव का लेखा-जोखा:- जनसंख्या:- 5200
साक्षरता:- 85 प्रतिशत
तह. मुख्यालय से दूरी:- 10 किमी
आवागमन:- बस व निजी वाहन
व्यवसाय:- खेत व पशुपालन किशनसिंह के निजी सहायक रहे भूपसिंह, गांव में आज भी खड़ी है हवेली भरतपुर इतिहास भाग संख्या 01 में ठाकुर गंगी सिंह के लिखे वक्तव्य के अनुसार नदबई क्षेत्र के गांव हसनपुर में सवाराम सिंह व गादौली में महाराज बदन सिंह के वंशज गुमानसिंह व मानसिंह की कोठरी निर्धारित रही। इन्ही के वंशज सेवा निवृत शिक्षक खुशहाल सिंह की मानें तो महाराजा किशन सिंह के निजी सहायक रहे गादौली निवासी भूपसिंह का सीधे तौर पर राजवंश से जुड़ाव रहा। महाराजा किशन सिंह ने 1925 में अपने निजी सहायक भूूपसिंह के आवास को लेकर हवेली का निर्माण कराया। 30 बीघा जमीन भी दी महाराजा किशन सिंह ने पुरुस्कृत करते हुए करीब 30 बीघा जमीन भी दी। आज भी गादौली में गुमान सिंह व मानसिंह एवं हसनपुर में सवाराम सिंह के वंशज मौजूद है। दो सौ साल से गणगौर मेला व कुश्ती दंगल आयोजित पूर्व सरपंच प्रतिनिधी राजकुमार गादौली ने बताया कि, भरतपुर राजवंश से ताल्लुक होने के चलते राजवंश की परम्परा के अनुरुप करीब दो सौ साल से प्रतिवर्ष गणगौर मेला व कुश्ती दंगल का आयोजन किया जा रहा। ग्रामीणों के सहयोग से ही गणगौर मेले पर आकर्षक झांकियों के बीच शोभायात्रा निकाली जाती। भरतपुर राजवंश से जुड़ाव होने के चलते गादौली के लोगों में पहले से ही कुश्ती दंगल का भी शौक रहता था। शासक रहे महाराजा किशन सिंह के दरबार में भगवत पहलवान व बाद में महावीर पहलवान गादौली भी शाही पहलवान रहे।

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