रामानुजगंज में गुंजन साहित्यिक संस्था द्वारा होली की पूर्व संध्या पर एक भव्य काव्य संध्या का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश-विदेश से आए कवियों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को हास्य, व्यंग्य और फागुन के रंगों में सराबोर कर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था की अध्यक्ष डॉ. दीपा गुप्ता ने की। उन्होंने होली के उल्लासपूर्ण वातावरण के साथ कार्यक्रम का संचालन करते हुए इसका शुभारंभ किया। सर्वप्रथम कृष्णा बाबूजी ने मां शारदे का आह्वान कर कार्यक्रम को भक्तिमय स्वर दिया। काव्य संध्या में सुरेश चंद्र शुक्ल (नार्वे) ने होली के रंगों पर आधारित कविता सुनाई। रुस्तम जी ने फागुन की मस्ती से ओतप्रोत रचना प्रस्तुत की, जबकि गिरधर जी ने प्रेम और अनुराग से भरी पंक्तियों से समां बांधा। निगम जी ने होली की उमंग और उत्साह का गुणगान करते हुए श्रोताओं को गुदगुदाया। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण प्रख्यात हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा रहे। उन्होंने समकालीन सामाजिक परिवेश पर तीखा व्यंग्य करते हुए कहा कि आज होली पर केवल रंग लगाने की नहीं, बल्कि चेहरों से कृत्रिम रंग उतारने की आवश्यकता है। उन्होंने कटाक्ष किया कि आज लोग अपने दुख से अधिक दूसरों के सुख से दुखी हैं। उनकी प्रस्तुति पर पूरा सभागार ठहाकों से गूंज उठा। शिशुपाल जी ने मतंग सवैये में गीत प्रस्तुत किया। कनाडा से भारती शर्मा फ़िरदौस ने प्रेम के रंगों से सजी रचना सुनाई, जबकि उत्तर प्रदेश के राजेश जी ने जोगीरा छंद के मुक्तकों से वातावरण को उल्लासमय बना दिया। अमेरिका से वीणा विज, बिहार से सुधांशु चक्रवर्ती और विनोद जी, उत्तर प्रदेश से डॉ. अर्जुन पांडे और आंध्र प्रदेश से सुधा कुमारी जूही ने भी अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में विविध रंग भरे। अंत में, संस्था अध्यक्ष डॉ. दीपा गुप्ता ने एक हास्य-व्यंग्य कविता प्रस्तुत की। भारती शर्मा फ़िरदौस ने धन्यवाद ज्ञापन किया। होली की यह साहित्यिक संध्या आनंद, उल्लास और रचनात्मक ऊर्जा से भरपूर रही।


