राजस्थान की जीवनरेखा मानी जाने वाली अरावली पहाड़ियों को बचाने की जंग अब तेज होती जा रही है। अरावली विरासत जन अभियान के बैनर तले गुजरात से शुरू हुई अरावली संरक्षण यात्रा अपने 700 किलोमीटर के सफर के बाद गुढागौड़जी के हुकमपुरा धरना स्थल पर पहुंची। यहां पिछले 57 दिनों से ग्रामीण अवैध खनन के खिलाफ धरने पर बैठे हैं। जैसे ही यात्रा की टीम हुकमपुरा पहुंची, पूरा क्षेत्र अरावली बचाओ-भविष्य बचाओ के नारों से गूंज उठा। ग्रामीणों ने डफ और चंग—की थाप के साथ टीम का स्वागत किया। धूल उड़ने से हवा जहरीली अभियान की टीम ने एडवोकेट जयन्त मूण्ड के नेतृत्व में प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। टीम ने हुकमपुरा, बामलास और गुढ़ा बावनी में चल रहे खनन और क्रेशरों का निरीक्षण किया। खनन क्षेत्र में होने वाले भारी विस्फोटों के कारण करीब 200 से अधिक घरों में दरारें आ चुकी हैं या वे आंशिक रूप से ढह चुके हैं। क्रेशरों से उड़ने वाली धूल और धुएं ने न केवल हवा को जहरीला बना दिया है, बल्कि पूरी प्रकृति को नुकसान पहुंचाया है। प्रशासन ने नहीं ली सुध महारुसेना के एडवोकेट जयन्त मूण्ड ने टीम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशासन की अनदेखी के कारण ग्रामीणों का जीना दूभर हो गया है। उन्होंने कहा हम पिछले 57 दिनों से सर्दी में यहां बैठे हैं। आवंटित लीज नियमों के विरुद्ध चल रही है। हमने हर स्तर पर पत्राचार किया और अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन माफियाओं के दबाव में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यह लड़ाई केवल हमारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों, नदी-नालों और अरावली के अस्तित्व को बचाने की है। हम माफियाओं के विरुद्ध अंतिम सांस तक संघर्ष करेंगे। ये रहे मौजूद इस दौरान अरावली संरक्षण यात्रा में शामिल नीमकाथाना से कैलाश मीणा, नीलम अहलुवालिया, रामलाल भट्ट, अशोक चौधरी, कुसुम रावत, दारासिंह मेघवंशी और स्थानीय स्तर पर लीलाधर मीणा, कैप्टन विनोद सिंह, राजबाला सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।


