गुडडू चौरसिया|गुमला हॉट सीट माने जा रहे वार्ड संख्या 20 और 22 में जीत-हार का फैसला महज चंद वोटों के फासले और री-काउंटिंग के बाद हुआ। वार्ड 20 में मुकाबला चैंबर के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी और लगातार दो बार की पार्षद ललिता गुप्ता के बीच था। शुरुआती गिनती के बाद जब रमेश चीनी को मात्र एक वोट से विजयी घोषित किया गया। तो मतगणना केंद्र के भीतर और बाहर सन्नाटा पसर गया। ललिता ने इस मामूली अंतर पर तुरंत आपत्ति दर्ज कराते हुए री-काउंटिंग की मांग की। दोबारा हुई गिनती में रोमांच और बढ़ गया। जब रमेश का जीत का अंतर बढ़कर चार मत हो गया। पूरे चुनाव में यह सबसे कम अंतर की जीत दर्ज की गई। इसी तरह सबसे बड़ा उलटफेर वार्ड 22 में देखने को मिला। पूर्व पार्षद अजीत त्रिपाठी के छोटे भाई अशोक त्रिपाठी के समर्थकों ने अपनी जीत को चर्चा शुरू कर दी, वे इतने आश्वस्त थे कि मतगणना केंद्र के बाहर उनके समर्थकों ने नारे और जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया था। जब उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी और विधायक भूषण बाड़ा के प्रतिनिधि मनीष साहू ने वोटों के मिलान पर आपत्ति जताई। दोबारा हुई जांच और वोटों के मिलान के बाद मनीष साहू 13 वोटों से विजयी घोषित किए गए। आधिकारिक घोषणा होते ही त्रिपाठी खेमे में मायूसी छा गई। जबकि मनीष के समर्थकों ने नारेबाजी से पूरे माहौल को गुंजायमान कर दिया। अब उपाध्यक्ष की कुर्सी के िलए जोड़ तोड़ वार्डों की जीत तो महज एक पड़ाव थी। असली लड़ाई अब उपाध्यक्ष की कुर्सी को लेकर शुरू हुई है। जीत के तुरंत बाद रमेश कुमार चीनी और मनीष साहू दोनों ने ही उपाध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी ठोक दी है। हालांकि यह राह इतनी आसान नहीं दिखती। राजनीतिक गलियारों में मोसर्रत प्रवीण और केके मिश्रा जैसे दिग्गज उम्मीदवारों के नाम भी मजबूती से चर्चा में हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि जोड़-तोड़ की इस राजनीति में कौन बाजी मारता है।


