मथुरा गेट स्थित गुरुद्वारा बाला प्रीतम साहिब का जीर्णोद्वार कराया जा रहा है, जो कि करीब 75 साल बाद हो रहा है। पहले यह एक रियासतकालीन मकान में संचालित था, लेकिन समाज ने इसे अब भव्य रूप देना तय किया है, जिसका निर्माण कार्य प्रारंभ हो गया है। खास बात ये है कि इस गुरुद्वारे को विभाजन के बाद पाकिस्तान से आए सिक्ख/पंजाबी समुदाय ने प्रारंभ किया। पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को मस्तानी की सराय में मकान आवंटित किए गए थे। इसमें एक मकान में श्रीगुरुग्रंथ साहिब को विराजमान कराया गया। गुरुद्वारा बाला प्रीतम साहिब प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष मिलाप सिंह ने बताया कि श्रीगुरुग्रंथ साहिब को विधर्मियों से बचाते हुए पाकिस्तान से लाया गया था। जिसे एक कमरे में स्थापित कर गुरुद्वारे का रूप दिया गया। चूंकि वक्त के साथ श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ गई है। इसलिए जन सहयोग से कमेटी गुरुद्वारे का जीर्णोद्वार करा रही है। इसमें 35 गुणा 40 फीट का ग्राउंड हॉल, कमरा तथा लैटबाथ का निर्माण कराया जा रहा है। पहली मंजिल में दीवान साहिब का निर्माण होगा। इसमें श्रीगुरुग्रंथ साहिब को विराजमान कराया जाएगा। इसके अलावा दूसरी मंजिल पर भी निर्माण प्रस्तावित है। फिलहाल ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर का निर्माण कराया जा रहा है। लागत करीब 65 लाख रुपए आएगी। इसी साल मई तक निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि बाला प्रीतम साहिब सिख धर्म के आठवें गुरु थे, जिन्हें गुरु हरकिशन साहिब जी के नाम से भी जाना जाता है।


