दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, तरनतारन की ओर से पट्टी में माता की चौकी का आयोजन किया गया। इस दौरान स्वामी सुनील जी ने माता का गुणगान करते हुए कहा कि आज हम महा जगदंबा की पूजा कई विधियों से कर रहे हैं, जैसे कीर्तन, जागरण, तीर्थ यात्रा, व्रत और उपवास। ये सभी तरीके माता की शक्ति के प्रति हमारी श्रद्धा के प्रतीक हैं, केवल बाहरी कर्मकांडों से पूर्ण फल की प्राप्ति नहीं होती। उन्होंने कहा कि यदि हमें माता को प्रसन्न करना है, तो उनकी आज्ञा मानने के साथ-साथ उन्हें तत्व से जानना भी आवश्यक है। देवी पुराण का संदर्भ देते हुए उन्होंने बताया कि जब हिमालय राज ने मां जगदंबा से उनके निवास स्थान के बारे में पूछा, तो मां ने उत्तर दिया, मैं ज्ञान की मूर्ति और दिव्य स्वरूप हूं; मैं हर जीवात्मा के हृदय में निवास करती हूं।’ तत्पश्चात, माता ने हिमालय राज को दिव्य चक्षु (दिव्य आंख) प्रदान किए, जिससे उन्होंने माता के वास्तविक स्वरूप के दर्शन किए। मां ने स्पष्ट किया है कि जो जीव मुझे पाना चाहता है, वह केवल ‘दिव्य ज्ञान’ के माध्यम से ही संभव है, और यह ज्ञान एक पूर्ण गुरु की शरण में जाने से ही प्राप्त होता है। अतः पूर्ण सतगुरु से ब्रह्मज्ञान की दीक्षा लेने के बाद ही सही मायने में मां की प्राप्ति संभव है, जिससे आत्मा जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाती है। इस अवसर पर स्वामी अमृत, स्वामी नरेश, स्वामी कुलबीरानंद, स्वामी सचिन, साध्वी मीनाक्षी भारती, साध्वी पुण्या भारती, साध्वी रेणु भारती और साध्वी हिना भारती ने महामाई के मधुर भजन गाकर संगत को निहाल किया।


