बूंदी के केशोरायपाटन क्षेत्र में कालीतलाई गांव में गुर्जर समाज की एक पंचायत बैठक आयोजित की गई। यह बैठक स्व. कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के ‘कर्ज मुक्त समाज’ के विचारों पर चलने और पुरानी सामाजिक परंपराओं में सुधार लाने के उद्देश्य से बुलाई गई थी। बैठक में मृत्युभोज से जुड़ी परंपराओं में बदलाव पर सहमति बनी। अब मृत्यु के तीसरे दिन और नौवें दिन केवल सब्जी-पूरी परोसी जाएगी। बारहवें दिन सादा भोजन, लड्डू, नुक्ती और नमकीन परोसने का निर्णय लिया गया है। इसके अतिरिक्त, बारहवें दिन बर्तन (थाली, कटोरी) बांटने और ‘पहरावणी’ (कपड़े आदि देने की प्रथा) को बंद कर दिया गया है। अब केवल ‘पगड़ी दस्तूर’ ही किया जाएगा। पंचायत ने चूड़ी प्रथा पर होने वाले अनावश्यक खर्चों पर भी रोक लगाई है। समाज के सदस्यों ने निर्णय लिया है कि कोई भी व्यक्ति अपनी बहू को घर पर चूड़ी नहीं पहनाएगा और न ही अपनी बहन या बेटी को चूड़ी पहनाने उसके ससुराल जाएगा। हालांकि, इस रिवाज को पूरी तरह से बंद नहीं किया गया है। अब बहन-बेटी को चूड़ी उनके मायके में ही पहनाई जाएगी और बहू भी अपने मायके में ही चूड़ी पहनेगी।


