नागौर जिला मुख्यालय पर MCH विंग में जननी सुरक्षा योजना (JSY) के तहत एम्बुलेंस संचालन के ठेके में अनियमिताओं की शिकायतों को जिला प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। अतिरिक्त जिला कलेक्टर चंपालाल जीनगर ने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए एक उच्च स्तरीय जांच टीम का गठन कर दिया है। कलेक्टर के निर्देश पर शुरू हुई इस जांच के दायरे में पूरी टेंडर प्रक्रिया और ठेकेदार की कार्यप्रणाली को रखा गया है।
प्रशासन द्वारा गठित इस विशेष टीम में जिला आपूर्ति अधिकारी (DSO), जिला परिवहन अधिकारी (DTO) और लेखा अधिकारियों (ACCOUNT OFFICER) को शामिल किया गया है ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और तकनीकी रूप से सटीक हो सके। इस टीम को अगले तीन से चार दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच के दौरान अधिकारी न केवल फाइलों को खंगालेंगे, बल्कि धरातल पर जाकर एम्बुलेंस सेवाओं का फील्ड वेरिफिकेशन भी करेंगे। इसमें टेंडर की शर्तों, ठेकेदार की पात्रता, वित्तीय स्वीकृतियों और अब तक हुए भुगतानों की बारीकी से समीक्षा की जाएगी।
अतिरिक्त जिला कलेक्टर चंपालाल जीनगर ने स्पष्ट किया है कि शिकायतों और सामने आए तथ्यों के आधार पर ही यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि जांच टीम की रिपोर्ट मिलने के बाद यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है, तो संबंधितों के खिलाफ कड़ी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
गौरतलब है कि गत दिनों सार्वजनिक निर्माण राज्य मंत्री डॉ मंजू बाघमार को इस मामले की शिकायत लोगों ने की थी जिस पर मंत्री ने मामले की जांच के आदेह दिये थे। आरोप है कि ठेकेदार टेंडर नियमों के विरुद्ध गैस किट से संचालित एम्बुलेंस का उपयोग JSY में कर रहा है। जिसके वीडियो भी सामने आए थे। लेकिन इस मामले की शिकायत जब JLN अस्पताल के पीएमओ आर के गुप्ता से की गई तो उन्होंने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया था कि हमारा काम केवल टेंडर जारी करना था बाकि देखरेख का काम MCH विंग का है। जबकि MCH विंग के JSY प्रभारी शैलेन्द्र का कहना था कि हमारे पास कोई पावर नहीं है कि हम इस पर कोई कार्रवाई कर सकें।


