पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन जसवीर सिंह गढ़ी ने आज अमृतसर सथित स्थित गोल्डन टेंपल में माथा टेका और समाज में बढ़ रहे जातीय भेदभाव पर चिंता जताई। अरदास के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि गुरु साहिबानों ने बराबरी और सांझीवालता का संदेश दिया था, लेकिन वह आज भी पूरी तरह जमीन पर लागू नहीं हो पाया है। गढ़ी ने कहा कि पहली पातशाही गुरु नानक देव जी ने लंगर की परंपरा शुरू कर एक साथ बैठकर भोजन करने का संदेश दिया। चौथी पातशाही ने अमृत सरोवर और चारों दिशाओं से खुले दरवाजों के माध्यम से समानता का प्रतीक स्थापित किया। पांचवीं पातशाही ने आदि ग्रंथ में अलग-अलग जातियों के संतों की वाणी शामिल कर सबको एक मंच पर जोड़ा। वहीं दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी ने एक ही बर्तन से अमृत छकाकर खालसा पंथ की स्थापना की। इसके बावजूद समाज में भेदभाव खत्म नहीं हुआ है। एक साल में 3,750 शिकायतें चिंताजनक चेयरमैन ने बताया कि पिछले एक साल में आयोग को जाति और धार्मिक भेदभाव से जुड़ी 3,750 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जो चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि यदि गुरु साहिबानों का संदेश सही अर्थों में अपनाया जाता तो इतनी शिकायतें सामने नहीं आतीं। तरनतारन की एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बाबा जीवन सिंह जी की तस्वीर नीचे और नेताओं की तस्वीर ऊपर लगाने को संकीर्ण सोच बताया। गढ़ी ने कहा कि वह अपने अधिकारों का पूरा उपयोग कर रहे हैं और सरकार को पत्र लिखकर भेदभाव समाप्त करने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग करेंगे।


