जयपुर | गोलोक धाम चाकसू निमोड़िया में चल रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान के पांचवें दिन शनिवार को भक्ति, श्रद्धा और जीव-दया का संगम देखने को मिला। तपोभूमि प्रणेता आचार्य प्रज्ञासागर मुनिराज के सान्निध्य में शांतिधारा का सौभाग्य तेजकरण, अक्षय चंदलाई वालों को मिला, जबकि गुरुदेव के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य ललिता देवी, सुरेश एवं स्नेहलता बाकलीवाल को प्राप्त हुआ। विधानाचार्य पंडित श्रेयश जैन (पिंडरई) के निर्देशन और जैनम जैन (इंदौर) के भजनों के बीच श्रद्धालुओं ने मंडल पर 128 अर्घ्य समर्पित किए। धर्मसभा में आचार्य ने सिद्धचक्र विधान की महिमा बताते हुए राजा श्रीपाल और मैना सुंदरी की प्रेरक कथा सुनाई। पुण्यार्जक परिवार सोधर्म इंद्र पारसमल, अमित पवन बाकलीवाल की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कोषाध्यक्ष रोहित जैन, कार्याध्यक्ष दीपक जैन और अरुण गोनेर सहित अन्य लोग मौजूद रहे। गोलोक धाम में गो और पर्यावरण संरक्षण को लेकर काम चल रहा है। समिति के अनुसार यहां 500 गायों के संरक्षण का लक्ष्य तय किया गया है। यहां गिर नस्ल की गायों के संवर्धन पर विशेष जोर रहेगा। परिसर और आसपास 20 हजार छायादार व फलदार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।


