गौरव वल्लभ ने राहुल गांधी को बताया कार्टून कैरेक्टर:कहा- रोज शाम मुझसे ट्यूशन लें; सड़क छाप’ बातें नहीं करें, विदेश जाते तो रहते स्टेबल रहते

संसद में हंगामे के बाद बीजेपी नेता और पीएम मोदी के आर्थिक सलाहकार गौरव वल्लभ ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। गौरव वल्लभ ने राहुल गांधी की समझ और उनकी भाषा शैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को अगर समझ में नहीं आता, तो उन्हें रोजाना शाम 4:30 बजे मुझसे इकोनॉमिक्स की ट्यूशन लेनी चाहिए। वे रोज योग की क्लास भी अटेंड करें।
क्योंकि वे रोज सुबह जल्दी नहीं उठते, इसलिए मैं शाम का शेड्यूल कह रहा हूं। हालांकि, उनको यह दोनों ही काम सुबह करने चाहिए। लेकिन वे सुबह जल्दी नहीं उठते, इसलिए शाम को 4:30 से 5:30 बजे तक योग करें और अपने मेंटल बैलेंस को स्थिर रखें। वे सड़क छाप की तरह बात नहीं करें। गौरव वल्लभ ने कहा कि राहुल गांधी लीडर ऑफ अपोजिशन हैं या कार्टून कैरेक्टर? लीडर ऑफ अपोजिशन एक संवैधानिक पद है और भारत के संविधान में इसकी व्यवस्था की गई है। इसे कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है। आप और हम जो सामान खरीदते हैं और जीएसटी देते हैं, उस जीएसटी से उनके गाड़ी-घोड़े और घर-बंगले की व्यवस्था की जाती है। वे चलते-चलते इस तरह के रिमार्क करते हैं। देश के एलओपी (LoP) की क्या गंभीरता है, मुझे इस बात का दुख होता है। उनके ऐश्वर्य और आराम का पैसा हम देते हैं। अगर मैं बाजार में जाकर 5 रूपए का टूथपेस्ट खरीदता हूं, तो उस जीएसटी से उनका ऐश्वर्य सुनिश्चित होता है। सिख दंगों पर घेरा: “देश को पता है गद्दार कौन है”
वल्लभ ने आगे कहा कि वे चलते-फिरते इस तरह के स्टेटमेंट देते हैं और किसी को भी गद्दार बोल देते हैं। देश-दुनिया को पता है कि गद्दार कौन है और किन्होंने देश के साथ गद्दारी की। किन्होंने सिख समुदाय के साथ गद्दारी की और किन्होंने सरेआम सिखों को जलाया, मारा और काटा है। यह सब करने के बाद बोला गया कि जब एक बड़ा पेड़ गिरता है, तो ऐसी घटनाएं होती हैं। इससे ज्यादा बेहूदा, घटिया, अर्थपूर्ण और सड़क छाप बयान संसद में खड़ा होकर कोई सांसद दे नहीं सकता। ऐसी बातें और ऐसी भाषा एक्सपेक्ट नहीं की जा सकती। आधा घंटे की ट्यूशन फीस 4 हजार
गौरव वल्लभ ने कहा कि राहुल गांधी के पास कोई डॉक्यूमेंट या प्रिंटेड वर्जन नहीं है। जिस आदमी को वे कोट कर रहे हैं, उस आदमी का वक्तव्य उनके पास नहीं है। जनरल नरवणे ने कम से कम 20 इंटरव्यू में अपनी स्थिति को स्पष्ट कर दिया है। इसके बावजूद बजट सेशन में बजट के बारे में बोलने के बजाय, राहुल इस तरह की देश विरोधी बातें संसद में खड़े होकर करना चाहते हैं। बजट सेशन में बजट नहीं पढ़ा जाता क्या? अगर बजट नहीं समझते, तो रोजाना शाम को 4 बजे मेरे पास आएं। मैं आधा घंटे का ट्यूशन दूंगा और मेरी फीस 4 हजार है। मैं 30 दिन तक समझाऊंगा, तब कम से कम आप इस तरह की बातें तो नहीं करेंगे। विदेशी यात्रा पर जाएं, तभी स्टेबल रहते हैं राहुल
उन्होंने कहा कि बजट सेशन में आप ऐसी पुस्तक को कोट कर रहे हैं जो प्रकाशित ही नहीं हुई। जब उन्हें रोका जाता है तो वे नाराज हो जाते हैं और मंत्रियों को गद्दार बोलते हैं। हमारी सभ्यता में हम ऐसा कभी नहीं बोलते, दोस्तों के साथ भी ऐसा व्यवहार नहीं करते। मुझे लगता है कि राहुल गांधी पिछले 20-25 दिन से कहीं फॉरेन नहीं गए हैं। फॉरेन जाने से ही उनका मानसिक स्तर स्टेबल रहता है। वे तुरंत किसी विदेश यात्रा पर जाएं – बैंकॉक, थाईलैंड, कोलंबिया या कंबोडिया। वहां वे विदेशी कार्यक्रमों में क्या करने जाते हैं, यह उनको पता होगा। पर वहां जाते हैं तो 10-15 दिन खुद को फ्रेश फील करते हैं और स्टेबल बातें करते हैं। अभी फॉरेन नहीं जाने के कारण ही वे इस तरह की बातें कर रहे हैं। राजस्थान के बजट में एक और एक ग्यारह का संयोग
राजस्थान के आगामी बजट पर वल्लभ ने कहा कि एक संयोग देखिए, यूनियन बजट 1 तारीख को आया और राजस्थान का बजट 11 तारीख को आने वाला है। एक और एक मिलकर ग्यारह होते हैं। प्राइम मिनिस्टर मोदी ने कई वक्तव्यों में कहा है कि विकसित राज्य ही विकसित भारत का निर्माण करते हैं। हम इस बात के पक्षधर हैं कि विकसित राजस्थान ही विकसित भारत 2047 के संकल्प को पूरा करेगा। 11 फरवरी को आने वाला राजस्थान का बजट विकसित राजस्थान की बड़ी नींव रखने वाला है। इसमें जबरदस्त योजनाओं की घोषणा होगी जिनका प्रभाव विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में पूर्ण रहेगा। डोटासरा को बताया चीयर लीडर्स का पुरुष संस्करण गौरव वल्लभ ने पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें उन्हीं चीजों पर वक्तव्य देने चाहिए जिनका उन्हें ज्ञान हो, जैसे नृत्य करना, गमछे हिलाना और गाड़ियों के बोनट पर चढ़ना। इकोनॉमी, प्रशासन और देश को आगे ले जाने पर डोटासरा ना ही बोलें तो उपयुक्त रहेगा। अगर वे ज्यादा बोलेंगे तो हमें बताना पड़ेगा कि उनके परिवार के कितने लोग आरएएस (RAS) बने और किन लोगों ने उनकी मदद की। कुछ लोग तो महाराणा प्रताप की पुण्य भूमि पर अभी भी घूम रहे हैं, जिन्होंने इस गोरखधंधे में काम किया है। उन्होंने कहा कि डोटासरा जी कृपया करके अर्थव्यवस्था और जीवन में सकारात्मक बदलाव पर ना बोलें। आपकी पीएचडी तो वंशवाद, परिवारवाद और परिवार के लोगों को आरएएस कैसे बनाया जाए, इसमें है। आपके लिए एक ही शब्द प्रयुक्त है कि आप ‘चीयर लीडर्स’ के पुरुष संस्करण हैं। डेवलपमेंट के बारे में ना आपका ज्ञान है और ना ही डिलीवरी। हां, घोटाले कैसे करने हैं और परिवार के लोगों को आरएएस कैसे बनाना है, यह पूछने के लिए डोटासरा साहब बड़े उपयुक्त व्यक्ति हैं। इस दौरान गौरव वल्लभ ने केन्द्र सरकार के बजट को विकसित भारत के लिए अहम बताया और इस एकोनॉमिक्स को मोदीनॉमिक्स भी बताया।

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